हैदराबाद , अक्टूबर 23 -- तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ महेश कुमार अग्रवाल ने शुक्रवार को बंजारा हिल्स स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) में आयोजित 'सदर्न रीजनल पुलिस कोऑर्डिनेशन कमेटी' (एसआरपीसीसी) की बैठक में पुलिसिंग से जुड़ी सात पहलों की जानकारी दी।
ये पहलें मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, नशीले पदार्थों पर नियंत्रण, लोगों की शिकायतों के निवारण, पुलिस कल्याण और पुनर्वास पर केंद्रित हैं।
उन्होंने बताया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए 70 विशेष इकाइयां काम कर रही हैं, और कुल 270 इकाइयां बनाने का लक्ष्य है। पिछले पांच महीनों में, इन इकाइयों ने 288 मामले दर्ज किए, 41,915 जागरूकता कार्यक्रम चलाए, लापता 49 महिलाओं और 87 बच्चों को ढूंढा, 41 बाल विवाह रोके, स्कूल छोड़ चुके 63 बच्चों को वापस शिक्षा से जोड़ा और बौद्धिक रूप से अक्षम 96 लोगों को बचाया। महिलाओं के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप रिपोर्टिंग सुविधा भी शुरू की गयी है।
पुलिस थानों के कामकाज को बेहतर बनाने और ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिए, तमिलनाडु सरकार ने छोटे, मध्यम और बड़े पुलिस थानों के लिए मासिक आकस्मिक निधि को बढ़ा दिया है। इसे छोटे थानों के लिए 350 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये, मध्यम थानों के लिए 6,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये और बड़े थानों के लिए 8,250 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया है।
सरकार ने 21 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। पुलिसकर्मियों द्वारा शिकायतकर्ताओं के साथ किए जाने वाले व्यवहार को बेहतर बनाने के लिए तीन दिवसीय व्यवहार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया, जिसमें लगभग 77 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। इसके लिए 8.85 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
श्री अग्रवाल ने बताया कि एनआईएमएचएएनएस के सहयोग से शुरू किए गए पुलिस कल्याण कार्यक्रम के तहत लगभग 15 हजार ऐसे कर्मियों की पहचान की गई, जिन्हें मानसिक स्वास्थ्य, नशामुक्ति और आत्महत्या-रोकथाम संबंधी सहायता की आवश्यकता थी। इनमें से 7,000 कर्मियों को मदद उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने जनता के साथ संवाद बेहतर करने और शिकायतों के निवारण के लिए पैदल गश्त को और अधिक सुव्यवस्थित करने पर भी जोर दिया। चेन्नई में चलाए जा रहे एक पुनर्वास कार्यक्रम के तहत 6,813 बेसहारा लोगों की पहचान की गई, जिनमें से 4,700 लोगों को आश्रय दिया गया और 1,000 से अधिक लोगों को उनके परिवारों से मिलाया गया; साथ ही, उन्हें चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। अग्रवाल ने पुलिस व्यवस्था और जन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दक्षिणी राज्यों के बीच 'बेस्ट प्रैक्टिस' (बेहतर कार्यप्रणालियों) को साझा करने के महत्व पर जोर दिया।
इस बैठक में पांच दक्षिणी राज्यों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तीन केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि और केंद्रीय एजेंसियों (जैसे आईबी, सीबीआई , डीआरआई,एनआईए, सीआईएसएफ, बीएसएफ और सीआरपीएफ) के अधिकारी शामिल हुए।
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