चेन्नई , सितंबर 13 -- अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु की 'तमिझगा वेत्री कषगम' (टीवीके) सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे दोनों वाम दलों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राज्य की दो विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में उतरने का फैसला किया है।
वाम दलों के इस फैसले से यह मुकाबला टीवीके, मुख्य विपक्षी दल द्रमुक, अन्नाद्रमुक एवं अभिनेता-निर्देशक सेंटमिजान सीमान के नेतृत्व वाली पार्टी नाम तमिलर काची (एनटीके) के बीच कड़े पंचकोणीय मुकाबले में बदल गया है।
माकपा-भाकपा के शीर्ष नेताओं ने अलग-अलग संवाददाता सम्मेलनों में कहा कि राज्य में किसी भी मोर्चे का हिस्सा न होने के कारण उन्होंने क्रमशः धारापुरम (सुरक्षित) और मदुरंतकम (सुरक्षित) सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही उन्होंने सत्तारूढ़ टीवीके को बाहर से अपना समर्थन जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कि सरकार को धर्मनिरपेक्षता बनाये रखने के लिए लगातार प्रयास करना होगा।
नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने टीवीके के नेतृत्व वाले नये मोर्चे 'सेक्युलर सोशल जस्टिस वेत्री अलायंस' में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।
इस गठबंधन में कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके शामिल हैं। एमडीएमके को छोड़कर अन्य तीन दल विजय मंत्रिमंडल में शामिल हैं, जो तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में पहली गठबंधन सरकार है।
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर होने के कारण दोनों दलों के नेताओं ने 15 सितंबर को अपने प्रत्याशियों की घोषणा करने की बात कही और मतदाताओं से विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व करने का अवसर देने की अपील की।
भाकपा के प्रदेश सचिव एम वीरपांडियन ने संवाददाताओं से कहा कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति में वाम दलों ने किसी भी मोर्चे के उम्मीदवार का समर्थन न करते हुए अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि भाकपा धारापुरम में और माकपा मदुरंतकम सीट पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
उधर, त्रिची में माकपा राज्य परिषद की बैठक के बाद प्रदेश सचिव पी षणमुगम ने भी यही रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि यह एक जबरन थोपा गया उपचुनाव है, क्योंकि इन दो सीटों से चुने गये जन प्रतिनिधियों ने जनभावनाओं को दरकिनार करते हुए 20 दिनों के भीतर इस्तीफा दे दिया, जिससे खरीद-फरोख्त के आरोप लगे हैं।
श्री षणमुगम ने कहा कि टीवीके का समर्थन न करने का मतलब यह नहीं है कि वाम दल उपचुनाव में द्रमुक का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि इस चुनाव से सरकार बदलने पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि चुनावी मैदान में उतरने के बावजूद श्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को समर्थन देने के उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आयेगा। उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रपति शासन और राज्य में भाजपा के अप्रत्यक्ष शासन को रोकने के लिए ही सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी टीवीके को सरकार बनाने के लिए बाहर से समर्थन दिया गया था।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग के उपचुनाव की अधिसूचना जारी किये जाने के बाद द्रमुक, टीवीके, अन्नाद्रमुक और एनटीके अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुके हैं। वाम दल हालांकि इस बात पर अड़े थे कि अन्नाद्रमुक छोड़कर टीवीके में शामिल हुए दोनों पूर्व विधायकों को टिकट न दिया जाए, क्योंकि उन पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगे थे।
इसके बावजूद श्री विजय ने इस्तीफा देने वाले पूर्व अन्नाद्रमुक विधायकों के मरागथम कुमारवेल को मदुरंतकम और पी सत्यभामा को धारापुरम सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।
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