चेन्नई , जून 22 -- अमोनिया गैस रिसाव की त्रासदी और कर्नाटक से जुड़े मेकेदातु बांध विवाद के मुद्दे पर बोलने की अनुमति देने से इनकार के तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के फैसले के बाद मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने सोमवार को सदन से बहिर्गमन किया।

सप्ताहांत की छुट्टियों के बाद आज जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, द्रमुक-अन्नाद्रमुक सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने गैस रिसाव का मुद्दा उठाने की कोशिश की। विधानसभा अध्यक्ष ने इसकी अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा कि श्रम कल्याण एवं कौशल विभाग मंत्री जे मोहम्मद फरवास विधानसभा के नियम 110 के तहत इस पर वक्तव्य देंगे।

पूर्व मंत्री और मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के सचेतक ईवी वेलु, अन्नाद्रमुक विधायक दल नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी, पीएमके विधायकों और अन्य सदस्यों ने इस पर असहमति जतायी। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें इस मुद्दे पर बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके बाद मंत्री अपना वक्तव्य दे सकते हैं। वे कुछ समय तक अपनी मांग पर अड़े रहे। इसके बाद मंत्री ने सदन में वक्तव्य दिया और सरकार के उठाये कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विजय ने मृतकों के परिवारों को दो लाख रुपये की विशेष राहत देने की घोषणा की है, त्रासदी की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है और अधिकारियों को खतरनाक उद्योगों का संयुक्त निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।

इसके बाद भी वेलु और ईपीएस अपनी मांग पर अड़े रहे, जिससे आसन के साथ उनकी तीखी बहस हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि नियम 110 के तहत किसी भी बहस की अनुमति नहीं दी जायेगी और उन्होंने उनके अनुरोध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। ईपीएस ने मेकेदातु बांध का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अन्नाद्रमुक 19 जून को मुख्यमंत्री के पेश और सदन में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के संशोधन से असहमत है। जब उन्होंने इस पर विशेषाधिकार प्रस्ताव लाना चाहा तो विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि प्रस्ताव पहले ही मंजूर हो चुका है। जब ईपीएस इस मांग पर अड़े रहे कि उनके विशेषाधिकार नोटिस पर विचार किया जाना चाहिए और इस पर उन्हें बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए, तो श्री प्रभाकर ने कहा कि यह उनके विचाराधीन है और वे तय करेंगे कि इसे कब लिया जाए।

इसके बावजूद अन्नाद्रमुक सदस्य अपनी मांग पर अड़े रहे तो विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे कहा कि दिन की कार्यवाही समाप्त होने से पहले उन्हें मेकेदातु मुद्दे पर बोलने की अनुमति देंगे। साथ ही उनसे अपनी सीट पर बैठने की अपील की। ईपीएस ने हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया और विधानसभा से बहिर्गमन कर गये।

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