चेन्नई , जून 17 -- तमिलनाडु के प्रार्थना गीत 'तमिल थाई वाझथु' को तीसरे स्थान पर धकेले जाने और 'वंदे मातरम' को लेकर उपजे विवाद के बीच, कल से शुरू हो रहे 17वीं विधानसभा के पहले सत्र में राज्यपाल आर. वी. आर्लेकर के पारंपरिक अभिभाषण पर सभी की नजरें टिकी हैं।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित टीवीके सरकार के इस पहले सत्र के संबोधन में राज्यपाल से नयी सरकार की नीतिगत पहलों को रेखांकित करने और सरकार की प्राथमिकताओं का खाका पेश करने की उम्मीद है। इस सत्र की अवधि का फैसला राज्यपाल के अभिभाषण के बाद अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के कक्ष में होने वाली कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में लिया जाएगा। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस और मुख्यमंत्री के जवाब के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाएगा और वर्ष 2026-2027 के बजट को पटल पर रखने के लिए इसे फिर से बुलाया जायेगा।
पूर्व राज्यपाल आर. एन. रवि ने सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगान न गाये जाने का हवाला देकर सदन से वॉकआउट किया था। यह देखना बाकी है कि क्या श्री आर्लेकर सरकार द्वारा तैयार किये गये अभिभाषण को पूरा पढ़ेंगे, विशेष रूप से श्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह और बाद में कैबिनेट विस्तार के बाद नये मंत्रियों के शामिल होने के समय पहले वंदे मातरम, फिर राष्ट्रगान और उसके बाद तमिल थाई वाझथु के गायन को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में।
राज्य के प्रार्थना गीत को तीसरे स्थान पर कर दिये जाने से एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सत्तारूढ़ टीवीके का कहना है कि शपथ ग्रहण समारोह राज्यपाल द्वारा आयोजित किया गया था और उन्होंने केंद्र के निर्देशों का पालन किया था। वहीं, टीवीके के सहयोगी दलों और द्रमुक एवं अन्नाद्रमुक जैसे विपक्षी दलों ने भी राज्य के प्रार्थना गीत का दर्जा घटाने को लेकर सरकार पर तंज कसा है।
इस मामले को मद्रास उच्च न्यायालय में भी ले जाया गया। न्यायालय ने राज्यपालों की उपस्थिति वाले राजकीय समारोहों के दौरान पहले वंदे मातरम और उसके बाद राष्ट्रगान गाने को अनिवार्य करने वाले गृह मंत्रालय के आदेश के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकारों को आठ सप्ताह में जवाब देने का नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश एस. ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पहली पीठ ने 12 जून को एक याचिका पर ये नोटिस जारी करने का आदेश दिया था। इस याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि तमिलनाडु का राज्य प्रार्थना गीत "तमिल थाई वाझथु" (मां तमिल की स्तुति का गीत), जिसे शपथ ग्रहण समारोह में तीसरे स्थान पर रखा गया था, तमिलनाडु में आधिकारिक राजकीय कार्यों और संवैधानिक समारोहों की शुरुआत में बजाया जाये।
इस पृष्ठभूमि में विधानसभा सत्र कल सुबह 10:00 बजे शुरू होगा, जब राज्यपाल सदन में अपना पहला अभिभाषण देंगे। सत्र से पहले का राजनीतिक परिदृश्य विपक्षी अन्नाद्रमुक के भीतर इस्तीफों और दलबदल की लहर से भी प्रभावित हुआ है। इस वजह से चुनाव परिणाम घोषित होने के एक महीने से कुछ अधिक समय बाद ही छह सीटें खाली हो गयी हैं। इन छह सीटों में से पांच अन्नाद्रमुक विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं और एक अन्य सीट श्री विजय के इस्तीफे के कारण खाली हुयी है। श्री विजय ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी।
पहले चार बागी विधायकों - श्रीमती मरकदम कुमारवेल (मदुरंतकम-एससी निर्वाचन क्षेत्र), एस जयकुमार (पेरुंदुरै), पी सत्यभामा (धारापुरम-एससी) और इसाकी सुब्बैया (अंबासमुद्रम) ने 25 और 26 मई को इस्तीफा दे दिया और वे टीवीके में शामिल हो गये थे। उनके बाद अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री डॉ. सी विजयभास्कर ने कल विरालीमलई के विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। अध्यक्ष ने उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिये हैं और उनकी सीटों को रिक्त अधिसूचित कर दिया गया है। इससे चुनाव आयोग के लिए श्री विजय द्वारा खाली की गई त्रिची ईस्ट के साथ इन सीटों पर उपचुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है।
यह सत्र काफी हंगामेदार रहने की उम्मीद है, क्योंकि मुख्य विपक्षी दल द्रमुक और अन्नाद्रमुक कई मुद्दों पर विजय प्रशासन को घेरेंगे। इसमें खरीद-फरोख्त का विवाद और अपराध एवं बच्चों के यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनायें शामिल हैं, जिसमें दो दिन पहले गुम्मिडीपूंडी में यौन उत्पीड़न के बाद एक तीन वर्षीय बच्ची की मौत का मामला भी शामिल है।
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