लखनऊ , सितंबर 12 -- उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद् के तत्वावधान में शनिवार को कैसरबाग स्थित गांधी भवन सभागार में प्रांतीय शैक्षिक उन्नयन संगोष्ठी एवं प्रधानाचार्य सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने विद्यालयों की वित्तीय, प्रशासनिक और सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानाचार्यों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और जायज मांगों के समाधान के लिए शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई एवं सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में प्रधानाचार्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

परिषद् के प्रदेशीय मुख्य संरक्षक देव कृष्ण शर्मा ने तदर्थ एवं कार्यवाहक प्रधानाचार्यों तथा प्रधानाध्यापकों के विनियमितीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कार्यरत तदर्थ प्रधानाचार्यों के विनियमितीकरण में अब और विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं आएगा। उन्होंने सरकार से इस मामले में तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर परिषद् का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांग रखेगा और मांगें पूरी नहीं होने पर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा।

परिषद् के प्रदेशीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सदस्य डॉ. हरेन्द्र कुमार राय ने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय की शैक्षिक, प्रशासनिक और अनुशासनात्मक व्यवस्था की धुरी हैं। बदलते शैक्षिक परिवेश में उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, जबकि सेवा संबंधी, वित्तीय और प्रशासनिक समस्याएं भी बनी हुई हैं। उन्होंने प्रधानाचार्यों से संगठन की एकजुटता बनाए रखने और शिक्षा तथा प्रधानाचार्य समाज के हित में सक्रिय रहने का आह्वान किया।

प्रदेशीय महामंत्री डॉ. सुखपाल सिंह तोमर ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की वित्तीय कठिनाइयों, पुरानी शुल्क दरों, बढ़ते विद्युत व्यय, आरटीई के कारण छात्र निधि पर पड़ रहे अतिरिक्त भार तथा प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की सेवा एवं वेतन संबंधी विसंगतियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का सीधा प्रभाव विद्यालयों के सुचारु संचालन और शैक्षिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

सम्मेलन में तदर्थ एवं कार्यवाहक प्रधानाचार्यों के विनियमितीकरण, हाईस्कूल के संस्था प्रधानों की वेतन विसंगतियों के समाधान, इंटरमीडिएट कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को त्रिस्तरीय वेतनमान, विद्यालय शुल्क में संशोधन, सहायता प्राप्त विद्यालयों के वाणिज्यिक विद्युत बिल में राहत, प्रधानाचार्यों की सेवा-सुरक्षा तथा धारा 18 और 21 की पूर्व व्यवस्था बहाल करने समेत कई मांगों पर चर्चा हुई।

इसके अलावा केंद्रीय एवं जवाहर नवोदय विद्यालयों तथा अन्य विद्यालयों से आए प्रधानाचार्यों को वेतन संरक्षण देने, आरटीई के तहत छात्र निधि से होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति तथा वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के लिए सम्मानजनक सेवा व्यवस्था की मांग भी उठाई गई।

एमएलसी उमेश द्विवेदी ने प्रधानाचार्यों की समस्याओं को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। एमएलसी अवनीश सिंह ने विद्यालयों की व्यावहारिक कठिनाइयों के समाधान को जरूरी बताया, जबकि एमएलसी मुकेश शर्मा ने परिषद् की मांगों को उचित बताते हुए सहयोग का आश्वासन दिया।

अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था में प्रधानाचार्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) प्रताप सिंह बघेल ने भी शैक्षिक गुणवत्ता और विद्यालयी व्यवस्था से जुड़े विषयों पर विचार रखे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने की। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा के उन्नयन तथा प्रधानाचार्यों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन के दौरान परिषद् की ओर से विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन उपमुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया। परिषद् के संरक्षक डॉ. वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने संगठन की एकजुटता को उसकी सबसे बड़ी शक्ति बताया।

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