पटना , अगस्त 09 -- बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने रविवार को कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) जैसी तकनीक शिक्षकों का शिक्षण प्रक्रिया में सहयोग करेगी, उनका विकल्प नहीं बनेगी।

श्री तिवारी ने कहा कि एआई का उपयोग शिक्षकों को सहयोग देने, बच्चों की सीखने की जरूरतों को समझने और बेहतर निर्णय लेने में सहायता के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई भी तकनीक तभी समावेशी होगी, जब वह बच्चों तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचेगी।

शिक्षा मंत्री ने राजधानी के अधिवेशन भवन में प्रदेश में शिक्षा की बेहतरी के लिए आज शुरू हुई राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बिहार सरकार का अंतिम लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि एआई कुछ ही क्षणों में उत्तर उपलब्ध करा सकता है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था के सामने इस बात की चुनौती है कि बच्चे उत्तर जानने के साथ जरुरी और सही सवाल पूछना भी सीखें। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमे बच्चे तकनीक का उपयोग करें, लेकिन उसके दास नहीं बनें।

श्री तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार बच्चों के साथ शिक्षकों को भी तकनीक से जोड़कर उनकी क्षमता बढ़ाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में ज्ञान के साथ तकनीक, तकनीक के साथ नैतिकता, बुद्धिमत्ता के साथ मानवता और उपलब्धि के साथ जिम्मेदारी का समन्वय जरूरी है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पीएम ई-विद्या के तहत कक्षा एक से 12 तक की पाठ्यपुस्तक आधारित शैक्षणिक सामग्री और वीडियो तैयार किए गए हैं। स्थानीय भाषाओं में भी शैक्षणिक सामग्री विकसित की जा रही है। उन्होंने विद्यालयों में वर्कबुक, यूनिट टेस्ट और टीचर डायरी के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे शिक्षण व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

श्री तिवारी ने कहा कि शिक्षकों के लिए पारदर्शी और चरणबद्ध स्थानांतरण व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को सुविधा देने के साथ विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन में 551 सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में मॉडल स्कूलों की शुरुआत की गई है। आगे प्रदेश को 142 और मॉडल स्कूल मिलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों से लोगों की अपेक्षाएं काफी अधिक हैं इसलिए इनकी गुणवत्ता और शैक्षणिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना होगा।

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