दरभंगा , सितंबर 08 -- ंद्रधारी मिथिला महाविद्यालय (सीएम कॉलेज) के प्राचार्य प्रो. मुश्ताक अहमद ने कहा कि मानव सभ्यता के आरंभ से ही विश्व निरंतर परिवर्तन का साक्षी रहा है, लेकिन पिछले दो दशकों में तकनीकी क्षेत्र में हुई प्रगति अभूतपूर्व रही है। सी.एम. कॉलेज, दरभंगा के सेमिनार हॉल में बीबीए विभाग की ओर से जीआईएमएस, ग्रेटर नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को 'रणनीतिक निर्णय लेने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका' विषय पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मुश्ताक अहमद ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग के प्रयोग ने प्रबंधन विशेषज्ञों तथा उद्यमियों की कार्यप्रणाली को नया आयाम दिया है। उन्होंने कहा कि भारत और विदेशों की कंपनियां जटिल व्यावसायिक समस्याओं के समाधान के लिए एआई का उपयोग कर रही हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि मानवीय बुद्धि और भागीदारी को नजरअंदाज किया जाए। तकनीकी युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय विवेक के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता के. गिरि ने प्रबंधन की मूल अवधारणाओं, वर्तमान स्थिति तथा रणनीतिक निर्णय प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने एआई की सीमाओं की भी चर्चा की।
बीबीए विभाग के समन्वयक डॉ. ललित शर्मा ने मशीन लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के ऐतिहासिक विकास क्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एआई के सुविचारित उपयोग से भारत और विदेशों में दक्ष पेशेवरों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
राजेश कुमार झा ने विद्यार्थियों में कौशल विकास की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी दक्षता और निरंतर परिश्रम के समन्वय से ही 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
संगोष्ठी में बीबीए एवं बीसीए विभाग के विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने एआई से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका वक्ताओं ने सारगर्भित उत्तर दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिव्या शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ललित शर्मा ने किया।
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