तिरुवनंतपुरम , सितंबर 27 -- साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के. एस. मनोज ने कहा है कि भारत में तकनीकी बदलाव के तहत ऐसी जटिल प्रणालियां विकसित हो रही हैं, जिन्हें केवल प्रशासनिक अधिकार के आधार पर संचालित नहीं किया जा सकता है।

श्री मनोज ने रविवार को कहा कि बिजली ग्रिड, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), दूरसंचार, एयरोस्पेस और अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "मुद्दा खुद नौकरशाही नहीं है। शासन, नियमन और जवाबदेही जरूरी हैं। खतरा तब शुरू होता है, जब अत्यधिक प्रभाव वाले तकनीकी मामलों में प्रशासनिक पदानुक्रम तकनीकी विशेषज्ञता का स्थान लेने लगता है।" उन्होंने कहा कि किसी वरिष्ठ प्रशासनिक पद से संस्थागत अधिकार तो मिलता है, लेकिन इससे इंजीनियरिंग, साइबर सुरक्षा, प्रणोदन या जटिल साइबर-भौतिक प्रणालियों में विशेषज्ञता अपने आप नहीं मिल जाती।

श्री मनोज ने कहा, "ऐसे क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी के बिना लिया गया कोई फैसला उस कार्यालय से कहीं आगे तक प्रभाव डाल सकता है, जहां वह फैसला लिया गया है।" उन्होंने कहा कि भारत द्वारा अंतरिक्ष सहित रणनीतिक क्षेत्रों में निजी भागीदारी बढ़ाए जाने के साथ यह मुद्दा विशेष महत्व रखता है। व्यावसायिक भागीदारी से नवाचार और क्षमता में तेजी आ सकती है, लेकिन तकनीकी अधिकार, सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था और रणनीतिक राष्ट्रीय नियंत्रण से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

श्री मनोज ने कहा कि वैश्विक तकनीकी और अंतरिक्ष शक्ति बनने की आकांक्षा रखने वाले देश के लिए नौकरशाही का पदानुक्रम कभी भी तकनीकी विशेषज्ञता से आगे नहीं निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने के बाद वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से केवल सलाह नहीं ली जानी चाहिए। अत्यधिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में योग्य तकनीकी विशेषज्ञों की निर्णय लेने की प्रक्रिया में सार्थक भूमिका होनी चाहिए और उनके पास ऐसे फैसलों को चुनौती देने का संस्थागत अधिकार भी होना चाहिए, जिनके बारे में इंजीनियरिंग संबंधी साक्ष्यों से अस्वीकार्य जोखिम का संकेत मिलता हो।

श्री मनोज ने कहा, "प्रशासन को संस्थानों का संचालन करने दें। नियमन को जवाबदेही सुनिश्चित करने दें, लेकिन तकनीक के संचालन का आधार प्रमाणित तकनीकी विशेषज्ञता को बनने दें।"उन्होंने कहा कि भारत की तकनीकी संप्रभुता केवल उन्नत तकनीकों के विकास पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर भी निर्भर करेगी कि इन तकनीकों को नियंत्रित करने वाले संस्थान केवल पदानुक्रम के आधार पर नहीं, बल्कि ज्ञान, विशेषज्ञता, स्वतंत्रता और पेशेवर जिम्मेदारी के आधार पर संचालित हों।

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