चंडीगढ़ , मार्च 17 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि साइबर अपराध और तथाकथित "डिजिटल अरेस्ट" के मामलों में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने एक अहम कदम उठाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत बैंकिंग लेनदेन में ड्यूल ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) का प्रावधान लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अक्सर साइबर ठग बुजुर्गों को डराकर या भ्रमित करके उनसे बैंक से जुड़े ओटीपी हासिल कर लेते हैं और उनके खातों से रकम निकाल लेते हैं। कई मामलों में खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर "डिजिटल अरेस्ट" का डर दिखाया जाता है, जिससे पीड़ित घबरा जाता है और ठगों के झांसे में आ जाता है।

नई व्यवस्था के तहत अब जब भी किसी खाते से ट्रांजैक्शन के लिए ओटीपी जनरेट होगा, तो वह केवल खाताधारक को ही नहीं बल्कि उसके नामित परिजन- जैसे बेटे या बेटी - को भी भेजा जाएगा। लेनदेन तभी पूरा होगा, जब दोनों ओटीपी सही तरीके से दर्ज किए जाएंगे। इससे किसी एक व्यक्ति के बहकावे में आने की स्थिति में भी ट्रांजैक्शन को रोका जा सकेगा।

श्री सैनी ने कहा कि यह पहल विशेष रूप से बुजुर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और इससे साइबर ठगी के मामलों में काफी हद तक कमी आने की उम्मीद है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे किसी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें और अपने बैंकिंग विवरण किसी के साथ साझा न करें।

सरकार का मानना है कि तकनीकी उपायों और जागरूकता के संयोजन से ही साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित