राजनांदगांव , जून 20 -- छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव, छुरिया और अंबागढ़ चौकी क्षेत्र के 12 किसानों ने एक कथित सूदखोर और उसके सहयोगियों पर कर्ज के एवज में उनकी कृषि भूमि फर्जी तरीके से अपने नाम कराने तथा वर्षों से न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि दो माह के भीतर उनकी जमीन वापस नहीं मिली तो वे परिवार सहित भूख हड़ताल करेंगे और राष्ट्रपति को सामूहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति के लिए आवेदन भेजेंगे।
किसानों द्वारा आज जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2008-09 में कृषि एवं घरेलू जरूरतों के लिए लिया गया ऋण ब्याज सहित चुका देने के बावजूद उनकी ऋण पुस्तिकाएं वापस नहीं की गईं। बाद में कथित रूप से कोरे स्टांप पेपरों और अन्य दस्तावेजों का उपयोग कर उनकी जमीनों की रजिस्ट्री करा ली गई।
पीड़ित किसानों का दावा है कि उन्हें डोंगरगांव में एक मकान में बुलाकर दबाव बनाया गया तथा पहले से तैयार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। किसानों ने मारपीट, धमकी और जबरन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के भी आरोप लगाए हैं।
विज्ञप्ति के अनुसार आदिवासी किसानों की भूमि कथित तौर पर एक आदिवासी व्यक्ति के नाम दर्ज कराई गई, जबकि अन्य मामलों में भी रजिस्ट्री के गवाह सूदखोर पक्ष से जुड़े लोग बताए गए हैं। किसानों का कहना है कि विवादित भूमि पर आज भी उनका भौतिक कब्जा है और खेती-बाड़ी वही कर रहे हैं।
किसानों ने दावा किया कि वर्ष 2014 में राजस्व अधिकारियों ने मामले की जांच कर कार्रवाई की अनुशंसा की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। उनका कहना है कि मामला पिछले दो वर्षों से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष लंबित है और वे 93 से अधिक पेशियां भुगत चुके हैं।
पीड़ित किसानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के किसान शामिल हैं। किसानों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर भूमि वापस दिलाने और कथित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में समाधान नहीं होने पर वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
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