पटना , अगस्त 28 -- बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने शुक्रवार को मधुमक्खी पालन, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य सहकारी संगठनों से जुड़े सदस्यों को सहकारिता से सीधे तौर पर जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
डॉ कुमार ने अपने कार्यालय कक्ष में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में गरीब, वंचित, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आम किसानों को प्राथमिकता के आधार पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद, प्रसंस्करण और विपणन में सहभागिता मिलनी चाहिए। इस बैठक में युवाओं के कौशल विकास हेतु उच्च शिक्षा में सहकारिता आधारित पाठ्यक्रम, डिग्री एवं डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की दिशा में आवश्यक पहल पर भी सार्थक विमर्श हुआ ।
डॉ. कुमार ने बैठक में राज्य में सहकारिता के क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनोपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान वेजिटेबल यूनियन की भांति मार्केटिंग यूनियन की प्रबंधकारिणी की कार्य-अवधि को एक वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने तथा संसद एवं विधान मंडल सदस्य सहकारी गृह निर्माण सोसायटी हेतु सदस्यता के संबंध में पूर्व के निर्देशों के अनुपालन पर चर्चा हुई। साथ ही, गयाजी में प्रस्तावित सहकारी ट्रेनिंग सेंटर की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई तथा बुनकर समितियों को आर्थिक मदद पहुँचाने, प्रखंड स्तरीय सभी समितियों का यूनियन द्वारा एफिलिएशन और समितियों को 98,000 रुपये प्रति समिति की दर से दी जाने वाली आर्थिक सहायता की प्रगति पर बल दिया गया।
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