नयी दिल्ली: , मई 23 -- दिल्ली कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने शनिवार को दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय (डीएसईयू) की बदहाली पर चिंता व्यक्ति की है और प्रदेश सरकार से इसे जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की है।
डॉ. नरेश आज पश्चिमी दिल्ली में मुंडका के पास बक्करवाला स्थित डीएसईयू पहुंचे और विश्वविद्यालय की बदहाल स्थिति को देखकर चिंता व्यक्ति की। इस दौरान उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल कागजों में दिखाई देता है। जमीनी स्तर पर इसकी हालत बेहद खराब और निराशाजनक है। उन्होंने बताया, "इस संबंध में मैंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को ज्ञापन सौंप है और उनसे विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की है, प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। उन्होंने बताया कि ज्ञापन की एक प्रति दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को भी भेजी गयी है।
कांग्रेस नेता ने कहा, "विश्वविद्यालय की अधिकांश इमारतें जर्जर हालत में हैं। खिड़कियां, दरवाजे और अन्य बुनियादी ढांचे या तो गायब हैं या चोरी हो चुके हैं। मैं जब पहुंचा, तो विश्वविद्यालय परिसर में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था और केवल दो चौकीदार तैनात मिले।"उन्होंने कहा कि यह जमीन और इमारत पहले दिल्ली शिक्षक विश्वविद्यालय के लिए निर्धारित थीं, जिन्हें बाद में डीएसईयू को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बाहरी दिल्ली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को आधुनिक कौशल आधारित शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, उद्यमिता के अवसर और रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रम उपलब्ध कराना था, लेकिन विश्वविद्यालय शुरू न होने से युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के क्षेत्र में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
डॉ. नरेश ने बताया कि डीएसईयू का मूल उद्देश्य युवाओं को केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक और तकनीकी शिक्षा प्रदान करना, उद्योगों, कंपनियों और स्वरोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना और युवाओं में उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देना था, ताकि वे केवल नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाले बन सकें।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अंतर्गत डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, व्यावसायिक और आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाने थे। साथ ही शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के लिए इंटर्नशिप और औद्योगिक संस्थानों के सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाना था, लेकिन विश्वविद्यालय की बदहाली के कारण ये सभी योजनाएं ठप पड़ी हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह संस्थान विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण कौशल शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था, ताकि तकनीकी, स्वास्थ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, होटल उद्योग, खुदरा कारोबार और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार के योग्य बनाया जा सके और बेरोजगारी कम की जा सके।
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