चंडीगढ़ , अगस्त 22 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ गुरप्रीत कौर से जुड़े पांच करोड़ रुपये के कथित मांग के आरोपों को लेकर राज्य की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो के अनुसार आयोग को एक शिकायत मिली है, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत सिंह की ओर से कथित तौर पर इस संबंध में दावे किये गये हैं।
श्री कानूनगो ने शनिवार को बताया कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी है। मामले की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के महिला सुरक्षा प्रभाग को भी दी गयी है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
आम आदमी पार्टी की ओर से कहा गया है कि डॉ गुरप्रीत कौर ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजीत सिंह को कानूनी नोटिस भेजकर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। पार्टी के अनुसार निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
आप विधायक एवं प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि उन्होंने अभी आरोपों से संबंधित रिपोर्ट का अध्ययन नहीं किया है और रिपोर्ट देखने के बाद ही टिप्पणी करेंगे। उन्होंने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है और किसी भी दावे को साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के तहत साबित किया जाना आवश्यक है।
मामले को लेकर भाजपा ने भी स्वतंत्र जांच की मांग की है। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने कहा कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या उच्चतम न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग भी है और आरोप उनकी पत्नी से जुड़े हैं, इसलिए राज्य स्तर पर जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री भगवंत मान अपनी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे और क्या आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे।
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने सोशल मीडिया पोस्ट में मीडिया के एक वर्ग पर आरोपों को लेकर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजीत सिंह का नाम सीधे लेने के बजाय उन्हें उनका रिश्तेदार बताकर संबोधित किया जा रहा है। श्री खैरा ने न्यायमूर्ति रंजीत सिंह के न्यायिक रिकॉर्ड को बेदाग बताते हुए उन्हें मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वाला व्यक्ति बताया।
श्री खैरा ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया का एक वर्ग एनएचआरसी द्वारा मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़े पांच करोड़ रुपये संबंधी आरोपों पर संज्ञान लेने की खबर को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने स्वतंत्र पत्रकारिता के प्रति अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता जताते हुए ऐसी रिपोर्टिंग की आलोचना की।
शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब की बेटियों और बहनों के साथ खड़ा होना उनका कर्तव्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के करीबी एक रिश्तेदार ने दुष्कर्म के एक आरोपी से पांच करोड़ रुपये की मांग की और इसके बाद आरोपी को कथित तौर पर दो महीने के भीतर बरी करा दिया गया।
श्री मजीठिया ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस का इस्तेमाल कथित पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय सत्ता के करीबी लोगों को बचाने के लिए किया गया। उन्होंने एनएचआरसी से पूरे मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की। अकाली नेता ने दावा किया कि मामले से संबंधित वीडियो, तस्वीरें और व्हाट्सऐप चैट सामने आने पर कई और तथ्यों का खुलासा हो सकता है।
श्री मजीठिया, श्री खैरा और अन्य नेताओं की ओर से लगाये गये आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ किसी तरह की दोषसिद्धि या गलत काम करने का कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। मामले में एनएचआरसी द्वारा पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी गयी है और जांच के निष्कर्ष का इंतजार है।
इस घटनाक्रम ने पंजाब में सत्तारूढ़ आप और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।
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