चंडीगढ़ , मई 30 -- ) हरियाणा की प्रमुख संवैधानिक भर्ती संस्था हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) में सदस्य का एक पद पिछले डेढ़ महीने से खाली पड़ा है।

आयोग के सदस्य रहे राजेंद्र कुमार का कार्यकाल 16 अप्रैल को समाप्त हो गया था, लेकिन अब तक उनके स्थान पर किसी नए सदस्य की नियुक्ति नहीं की गय है। इसे लेकर प्रशासनिक और संवैधानिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं संवैधानिक मामलों के जानकार अधिवक्ता हेमंत कुमार का कहना है कि राज्य लोक सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में स्वीकृत पदों का लंबे समय तक रिक्त रहना गंभीर विषय है और इससे आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। संविधान के अनुच्छेद 316(2) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल नियुक्ति की तिथि से छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, निर्धारित होता है। राजेंद्र कुमार को 23 सितंबर 2022 को सदस्य नियुक्त किया गया था, लेकिन 62 वर्ष की आयु पूरी होने के कारण उनका कार्यकाल 16 अप्रैल को समाप्त हो गया।

वर्तमान में आयोग में अध्यक्ष आलोक वर्मा सहित चार सदस्य कार्यरत हैं। श्री आनंद कुमार शर्मा, श्रीमती ज्योति बैंदा, श्रीमती ममता यादव और डॉ. सोनिया त्रिखा इसके सदस्य के रूप में कार्य कर रही हैं। श्री कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद एक पद रिक्त है।

श्री कुमार के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 316(1) के तहत आयोग में कम से कम आधे सदस्य ऐसे होने चाहिए, जिन्होंने केंद्र या राज्य सरकार की सेवा में कम-से-कम दस वर्ष कार्य किया हो। वर्तमान संरचना में यह शर्त पूरी हो रही है, इसलिए सरकार चाहे तो नए सदस्य के रूप में राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक या अन्य गैर-सरकारी क्षेत्र से किसी व्यक्ति की नियुक्ति कर सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो एचपीएससी विनियमों में संशोधन कर सदस्यों की संख्या पांच से घटाकर चार कर सकती है। इससे पहले मनोहर लाल खट्टर सरकार आयोग में सदस्यों की संख्या आठ से घटाकर पांच कर चुकी है।

इस बीच, आयोग के सचिव मुकेश आहूजा के 31 मार्च सेवानिवृत्त होने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें तीन माह की पुनर्नियुक्ति देकर 30 जून 2026 तक पद पर बनाए रखा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सचिव पद पर निरंतरता बनाए रखने के लिए तत्काल निर्णय लेने वाली सरकार सदस्य पद की नियुक्ति को लेकर अब तक फैसला क्यों नहीं कर पाई।

उधर, अक्टूबर 2026 में आयोग के अध्यक्ष आलोक वर्मा का कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है, जिससे आयोग में शीर्ष स्तर पर बदलाव की संभावना बढ़ गई है। हेमंत कुमार का कहना है कि यदि मुकेश आहूजा को भविष्य में सदस्य या अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है, तो दोनों ही स्थितियों में उनका कार्यकाल मार्च 2028 तक ही रहेगा, जब वे 62 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे।

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