नई दिल्ली , अगस्त 19 -- फसल संरक्षण के लिए कीटनाशक रसायन बनाने वाली घरेलू कंपनियों ने नये रसायनों की स्वीकृति के सिलसिले में नियामक के पास जमा कराये गये डेटा को एक पर्याप्त अवधि तक किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा न करने की व्यवस्था करने का सरकार से आग्रह किया है।
उनका कहना है कि नियामकीय डेटा संरक्षण (पीआरडी) लागू होने का सबसे पहले किसानों को लाभ होगा और घरेलू कृषि रसायन विनिर्माताओं तथा निर्यातकों को फायदा मिलेगा। इन कंपनियों का कहना है कि देश में अभी इस क्षेत्र में डाटा संरक्षण की शुरुआत नहीं हुई है जबकि चीन छह वर्ष का डेटा संरक्षण प्रदान करता है और वह आज दुनिया का सबसे बड़ा कृषि-रसायन निर्यातक है। थाईलैंड, ब्राजील और अमेरिका में यह संरक्षण अवधि 10 वर्ष तक है। यूरोपीय संघ 10 वर्ष का संरक्षण देता है, जिसे कम जोखिम वाले और जैविक उत्पादों के लिए हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल रसायन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 13 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
कीटनाशक रसायनों का विनिर्माण करने वाली देश की प्रमुख कंपनियों- क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन, रैलिस इंडिया, धनुका एग्रीटेक, पीआई इंडस्ट्रीज और गोदरेज एग्रोवेट ने एक साझा बयान में कहा , ' सीमित अवधि के लिए डेटा संरक्षण की व्यवस्था ऐसा महत्वपूर्ण प्रोत्साहन है, जिसकी मदद से नई, अधिक सुरक्षित और कम मात्रा में इस्तेमाल होने वाली कृषि-रसायन तकनीकों को भारतीय खेतों तक तेजी से पहुंचाया जा सकता है।" उन्होंने कहा कि इसका सबसे स्पष्ट लाभ किसानों और घरेलू विनिर्माता इकाइयों को होगा।
बयान में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कीटों, खरपतवार और फसल रोगों के स्वरूप में बदलाव हो रहा है। कीटों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से उन पर पुरानी कीटनाशक दवाओं का असर कम हो रहा है। नई पीढ़ी के बेहतर अणु (रसायन) अधिक लक्षित तरीके से काम करते हैं जिससे फसल सुरक्षा बढ़ती है और कृषि उपज में रासायनिक अपशिष्ट का स्तर घटता है।
विज्ञप्ति में क्रापलाइफ इंडिया-एस बैंक नॉलेज रिपोर्ट और कुछ अन्य अध्ययनों के हवाले से विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत में हर वर्ष कीटों, खरपतवार और रोगों के कारण अनुमानतः 10 प्रतिशत से 35 प्रतिशत कृषि उत्पादन का नुकसान होता है, जिसकी अनुमानित आर्थिक लागत करीब 2 लाख करोड़ रुपये है। इन कंपनियों ने कहा कि भारत जिन देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है, उन्होंने डेटा संरक्षण व्यवस्था लागू करके अपने कृषि-रसायन उद्योग को मजबूत किया है।
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