तिरुवनंतपुरम , जून 25 -- भारत जब हाल ही में प्रक्षेपण में आई दिक्कतों के बाद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) के अगले मिशन की तैयारी कर रहा है, तो इंटरनेशनल साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के.एस. मनोज ने गुरुवार को कहा कि सबका ध्यान सिर्फ़ इंजन, फ्यूल सिस्टम और स्ट्रक्चरल भरोसेमंद होने पर ही नहीं, बल्कि उस डेटा की सटीकता पर भी होना चाहिए जो आधुनिक स्पेस मिशन को निर्देशित करता है।
वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र के सामने आ रही नई चुनौतियों के विश्लेषण में श्री मनोज ने बताया कि आधुनिक प्रक्षेपण यान तेज़ी से सॉफ्टवेयर-आधारित और ऑटोनॉमस सिस्टम पर निर्भर होते जा रहे हैं, जिससे डेटा पर भरोसा उतना ही ज़रूरी हो गई है जितना हार्डवेयर पर है।
उन्होंने कहा, "हर प्रक्षेपण वाहन ऊंचाई, तेज़ी (एक्सेलरेशन), दबाव, तापमान, दिशा और इंजन की कार्यक्षमता को मापने के लिए सैकड़ों सेंसर पर निर्भर करता है। फ्लाइट कंप्यूटर इस जानकारी का इस्तेमाल करके तुरंत फैसले लेते हैं। अगर डेटा गलत होता है, तो लिए गए फैसले भी गलत हो सकते हैं।"श्री मनोज ने बताया कि जोखिम पैदा करने के लिए सेंसर का पूरी तरह से फेल होना ज़रूरी नहीं है। आकलन में बदलाव, पर्यावरण से जुड़े कारण, सॉफ्टवेयर की गलत व्याख्या और दूसरी वजहों से गलत माप हो सकते हैं, जो ऑटोमेटेड सिस्टम को गुमराह कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यह चुनौती सिर्फ़ स्पेस फ्लाइट तक ही सीमित नहीं है। कमर्शियल एविएशन, ऑटोनॉमस गाड़ियां, पावर ग्रिड, इंडस्ट्रियल कंट्रोल सिस्टम और मिलिट्री प्लेटफॉर्म में भी ऐसी ही चिंताएं हैं, जहां तेज़ी से बढ़ते ऑटोमेटेड सिस्टम को भरोसेमंद जानकारी और गुमराह करने वाले या खराब डेटा के बीच फर्क करना होता है।
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