तिरुवनंतपुरम , अक्टूबर 25 -- केरल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा है कि नदियों, नहरों और अन्य जल स्रोतों के विस्तृत नेटवर्क वाले केरल जैसे राज्य में तैराकी सीखना जीवन बचाने वाला एक अनिवार्य कौशल है।
उन्होंने रविवार को सड़क सुरक्षा जागरूकता की तर्ज पर बचपन से ही बच्चों के लिए अनिवार्य जल सुरक्षा शिक्षा की वकालत की।
श्री मुरलीधरन ने डूबने से बचाव पर यहां आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया तकनीकी समिति की बैठक का उद्घाटन करते हुए खदानों, नहरों, नदी के किनारों और तटीय क्षेत्रों जैसे खतरनाक स्थानों पर व्यापक सुरक्षा उपायों के साथ-साथ मजबूत बचाव नेटवर्क और सामुदायिक स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कार्डियोपल्मोनरी रिसुसिटेशन (सीपीआर) प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने, एम्बुलेंस की प्रतिक्रिया क्षमताओं में सुधार करने और डूबने की घटना के बाद के महत्वपूर्ण समय में समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन विभागों को पर्याप्त सुविधाओं से लैस करने का भी आह्वान किया। डूबने से बचाव के लिए व्यापक दृष्टिकोण पर जोर देते हुए श्री मुरलीधरन ने कहा कि ऐसे प्रयासों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, परामर्श सेवाओं और आपातकालीन संकट हस्तक्षेप प्रणालियों के साथ भी जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि डूबने से होने वाली सभी मौतें दुर्घटनाएं नहीं होती हैं।
मंत्री ने बचाव कार्यों में आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों, तटीय पुलिस कर्मियों और मछुआरों द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि उनके साहस, व्यावहारिक अनुभव और स्थानीय जलस्रोतों की गहरी जानकारी को बचाव तंत्र और सामुदायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में औपचारिक रूप से शामिल किया जाना चाहिए। यह बैठक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राज्य स्वास्थ्य शिक्षा विभाग, ऑस्ट्रेलियाई सरकार, रॉयल लाइफ सेविंग सोसाइटी ऑस्ट्रेलिया और जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ, ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर आयोजित की थी।
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