बैतूल , सितंबर 03 -- मध्यप्रदेश में चीनी के भंडारण को लेकर राज्य सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। अब कोई भी डीलर एक समय में चार हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके अलावा जारी स्टॉक को 30 दिन से अधिक अवधि तक भंडारित करने की अनुमति नहीं होगी।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इस संबंध में प्रदेश के सभी कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। चीनी के स्टॉक की निगरानी और उपलब्धता व्यवस्थित बनाए रखने के लिए डीलरों को स्टॉक घोषणा संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया है।

सभी डीलरों को भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर अपने चीनी स्टॉक की घोषणा नियमित रूप से अद्यतन करनी होगी। अधिकारियों को इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, सरकारी खाते पर अथवा राज्य सरकार या उसके अधिकृत प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से वितरण के लिए किसी डीलर के पास रखे चीनी स्टॉक पर चार हजार क्विंटल की सीमा लागू नहीं होगी।

थोक उपभोक्ताओं के लिए भी चीनी के भंडारण की अवधि निर्धारित की गई है। उत्पादन, उपभोग अथवा उपयोग के लिए कच्चे माल के रूप में प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन चीनी का उपयोग करने वाले थोक उपभोक्ता 15 दिन से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।

थोक उपभोक्ताओं में हलवाई, मिठाई विक्रेता, शीतल पेय निर्माता और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सहित अन्य इकाइयां शामिल हैं। इस श्रेणी में वे इकाइयां आती हैं, जिन्होंने चालू माह को छोड़कर पिछले एक वर्ष के दौरान औसतन न्यूनतम 100 मीट्रिक टन मासिक चीनी का उपयोग किया है। राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को इन प्रावधानों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।

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