अगरतला , अगस्त 28 -- त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ की मौत की घटना को लेकर शुक्रवार को राज्य विधानसभा में उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने त्रिपुरा उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर स्वतंत्र जांच की मांग की।

यह विरोध तब शुरू हुआ जब विधानसभा अध्यक्ष रामपद जमातिया ने विधानसभा के नियमों का हवाला देते हुए विपक्ष को कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा करने की अनुमति नहीं दी।

नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने इस मामले को उठाने की कोशिश की और कल दिये गये मुख्यमंत्री के बयान का हवाला देते हुए डीजीपी की मौत की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। अध्यक्ष ने हालांकि नियम 361 का हवाला दिया और कहा कि विपक्ष के मांगे गये तरीके से इस मामले पर चर्चा नहीं की जा सकती है और निर्धारित नियमों के पालन की आवश्यकता को बनाये रखा। इसके बाद आक्रोशित होकर माकपा विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया और अपनी मांग पर जोर देते हुए सदन के वेल में प्रवेश कर गये।

मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने डीजीपी की मौत के बारे में विवरण उजागर करने के सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि ऐसा पारदर्शिता और जन जागरूकता के हित में किया गया था।

डॉ. साहा ने उल्लेख किया कि उपलब्ध रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि मौत आत्महत्या की वजह से हुई थी और उन्होंने प्रासंगिक विवरणों के प्रकटीकरण को सही ठहराया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाई-प्रोफाइल मामलों में, मुख्यमंत्री या गृह मंत्री कानूनी सीमाओं के भीतर विधानसभा में जानकारी साझा कर सकते हैं।

सरकार के इस रुख पर विपक्ष डीजीपी की मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की अपनी मांग पर अड़ा रहा।

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