पीलीभीत , मार्च 6 -- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) के फर्जी हस्ताक्षर और जाली सरकारी पत्र का इस्तेमाल कर बैंक से करोड़ों रुपये का लोन लेने का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। मामले के खुलासे के बाद डीएफओ ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि एक राइस मिल के लिए बैंक ऑफ इंडिया की पूरनपुर शाखा से ऋण प्राप्त करने के उद्देश्य से आरोपी नरेंद्र सिंह ने उनके जाली हस्ताक्षर और कार्यालय की फर्जी मुहर का इस्तेमाल कर एक पत्र तैयार किया।

इस जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब बैंक ने पत्र के सत्यापन के लिए संबंधित पत्रावली डीएफओ कार्यालय भेजी। विभाग के डिस्पैच रजिस्टर की जांच में पत्रावली का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे स्पष्ट हो गया कि पत्र पूरी तरह से फर्जी था और विभाग द्वारा कभी जारी नहीं किया गया।

डीएफओ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक को औपचारिक तहरीर भेजी है और आरोपी नरेंद्र सिंह के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने बताया कि वन विभाग ने बैंक को भी सूचित कर दिया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसी प्रकार का ऋण स्वीकृत न किया जाए। साथ ही क्षेत्रीय वनाधिकारी (बराही) को थाना माधोटांडा में उपस्थित होकर प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वन विभाग के अनुसार यह मामला पूरनपुर तहसील के ग्राम अमृतपुर निवासी नरेंद्र सिंह से जुड़ा है, जो ग्राम अर्जुनपुर में अपनी भूमि पर 'मैसर्स एम.के. फूड्स' के नाम से राइस मिल का निर्माण करा रहा है।

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