नई दिल्ली , अक्टूबर 30 -- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 'इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव' (ईएसटीआईसी) 2026 सम्मेलन में अगली पीढ़ी की चिप और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी से जुड़ी अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन किया है।

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि तीन दिन तक चले इस कार्यक्रम में डीआरडीओ ने सेमीकंडक्टर और नई पीढ़ी की चिप प्रौद्योगिकी पर विशेष सत्र का नेतृत्व किया। इसमें उद्योग, शिक्षा जगत और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े विशेषज्ञों ने स्वदेशी चिप प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

डीआरडीओ के विशिष्ट वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली के महानिदेशक डॉ. बीके दास की अध्यक्षता में हुए इस सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चिप, चिप में ही सूचनाओं को तेजी से समझने और संसाधित करने की क्षमता तथा माइक्रोप्रोसेसर प्रौद्योगिकी के विकास पर चर्चा हुई। डॉ. दास ने पैनल चर्चा का संचालन भी किया। इसमें विशिष्ट वैज्ञानिक और माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कंप्यूटेशनल सिस्टम एवं साइबर सिस्टम की महानिदेशक डॉ. शीना रानी सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए।

सत्र में बताया गया कि डीआरडीओ उद्योगों और स्टार्टअप को नई प्रौद्योगिकी विकसित करने, अगली पीढ़ी की चिप डिजाइन करने और स्वदेशी तकनीकी क्षमता मजबूत करने में मदद कर रहा है।

सम्मेलन में डीआरडीओ के प्रदर्शनी स्टॉल पर उसकी प्रयोगशालाओं में विकसित कई स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया गया। इनमें उन्नत संचार प्रणाली, क्वांटम तकनीक के नमूने, अत्यधिक ठंडे मौसम में इस्तेमाल होने वाले कपड़े, महिला सुरक्षा के लिए बनाया गया 'प्रबला' फुल बॉडी प्रोटेक्टर, बिना बिजली और बिजली से चलने वाले एक्सोस्केलेटन, पोर्टेबल हाइब्रिड ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली, उच्च क्षमता वाले पल्स लेजर डायोड और स्क्रैमजेट इंजन प्रौद्योगिकी शामिल थीं।

सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी की चिप से जुड़ी प्रदर्शनी में डीआरडीओ ने दो प्रमुख प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। इनमें मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट (एमएमआईसी) और इन्फ्रारेड फोकल प्लेन एरे (आईआरएफपीए) शामिल हैं। इन्हें दिल्ली स्थित सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी ने विकसित किया है।

प्रदर्शनी में गैलियम आर्सेनाइड और गैलियम नाइट्राइड पर आधारित एमएमआईसी के साथ मल्टी-चिप मॉड्यूल भी दिखाए गए। इनका इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण रणनीतिक अभियानों में किया गया है। ये उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के अहम हिस्से हैं।

डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट इंजन तकनीक और न्यूरोमॉर्फिक एक्सेलरेटर का भी प्रदर्शन किया। इसके अलावा उन्नत संचार प्रणाली, क्वांटम रैंडम नंबर जेनरेटर, सुरक्षा उपकरण, एक्सोस्केलेटन, पोर्टेबल ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली, फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट और लेजर प्रॉक्सिमिटी सेंसर भी प्रदर्शित किए गए।

प्रदर्शनी में यह झलक देखने को मिली कि सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी देश की सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और डिजिटल सुरक्षा के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। संचार उपकरणों, उन्नत सेंसर और रक्षा प्रणालियों से लेकर आधुनिक तकनीकों तक में चिप की अहम भूमिका है। इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए केवल चिप बनाना ही नहीं, बल्कि उसकी डिजाइन, निर्माण, जांच, बड़े पैमाने पर उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।

भारत का लक्ष्य 2047 तक अगली पीढ़ी की चुनिंदा चिप तकनीकों में अग्रणी स्थान हासिल करना और दुनिया में भरोसेमंद तथा आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर केंद्र बनना है। इसके लिए देश में मजबूत सेमीकंडक्टर व्यवस्था विकसित करने, रोजगार के बेहतर अवसर पैदा करने और समाज को इसका लाभ पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

डीआरडीओ की रणनीतिक रक्षा प्रयोगशालाओं और विशेष सेमीकंडक्टर केंद्रों ने गैलियम आर्सेनाइड, गैलियम नाइट्राइड, माइक्रो-इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम (एमईएमएस) और सिलिकॉन तकनीक के क्षेत्र में विशेष क्षमता विकसित की है। इनमें सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी, गैलियम आर्सेनाइड एनबलिंग टेक्नोलॉजी सेंटर, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड रिसर्च सेंटर और सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी शामिल हैं।

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