मुंबई , सितंबर 12 -- राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की मुंबई क्षेत्रीय इकाई ने छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा (सीएएमआईए) के ज़रिए चल रहे सोने की तस्करी के एक संगठित गिरोह का पर्दाफ़ाश कर पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है, जिनमें दो ट्रांज़िट यात्री और हवाईअड्डा कर्मचारी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि डीआरआई ने विदेशी मूल का 3.56 किलोग्राम सोना ज़ब्त किया है। यह सोना मोम के रूप में था जिसमें सोने का बुरादा मिला हुआ था और इसे आठ कैप्सूल में छिपाकर रखा गया था। इसकी कुल कीमत लगभग 5.47 करोड़ रुपये है।

उन्होंने बताया कि यह अभियान "ऑपरेशन गोल्डन नेक्सस" के तहत चलाया गया था। यह कार्रवाई हवाईअड्डा कर्मचारियों की कथित मदद से अंतरराष्ट्रीय ट्रांज़िट यात्रियों के ज़रिए सोने की तस्करी के बारे में मिली खास खुफिया जानकारी के आधार पर की गई।

डीआरआई अधिकारियों ने अभियान के दौरान दुबई से मुंबई होते हुए बैंकॉक जा रहे मोहम्मद ज़ाहिद शेख (50) को रोका था। आरोप है कि उसने गेट 84 के पास प्रार्थना कक्ष के पास हवाईअड्डे के एक कर्मचारी को सोने से भरे दो कैप्सूल सौंपे थे।

एक अन्य ट्रांज़िट यात्री इनामुल मोहम्मद यासीन इस्लाम (45), जो मस्कट से मुंबई होते हुए बैंकॉक जा रहा था के बारे में भी पता चला कि उसने ट्रांज़िट एरिया में तीन कैप्सूल सौंपे थे।

इसके बाद जांच में डीआरआई ज़फ़र शेख हसन (21) तक पहुँची। जफर एयर इंडिया एयरपोर्ट सर्विसेज़ लिमिटेड में कस्टमर सर्विस एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम करता था। खुफिया जानकारी मिली थी कि वह हवाईअड्डे से तस्करी का सोना बाहर निकालने में शामिल था, इसलिए उसे हवाईअड्डे से निकलने के बाद रोका गया।

एजेंसी ने बताया कि उसके पास से मोज़े में छिपाकर रखे गए अंडे के आकार के तीन कैप्सूल बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान जफर ने हवाईअड्डे के ही एक अन्य कर्मचारी काजल जायसवाल (25) की भूमिका का खुलासा किया, जिसने उसे सोना सौंपा था।

उन्होंने बताया कि यात्रियों और हवाईअड्डा कर्मचारियों के बीच सोना तस्करी में सहयाेग करने वाले एक हैंडलर को भी गिरफ़्तार किया गया, जिससे इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या पांच हो गई।

आरोपियों पर सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 135 के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। डीआरआई ने कहा कि दोनों ट्रांज़िट यात्रियों ने सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 108 के तहत दर्ज अपने बयानों में सोने की तस्करी करने वाले गिरोह के लिए काम करने की बात स्वीकार की है। एजेंसी ने कहा कि इस ऑपरेशन के पीछे के मास्टरमाइंड की पहचान करने, वित्तीय और लॉजिस्टिकल लिंक का पता लगाने और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।

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