नयी दिल्ली , अगस्त 10 -- राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने मुंबई एयर कार्गो परिसर में नशीली दवाओं के अवैध निर्यात की एक बड़ी खेप बरामद करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

डीआरआई अधिकारियों ने खुफिया सूचना के आधार पर चलाये गये एक अभियान में मुंबई एयर कार्गो परिसर में नाइजीरिया भेजी जा रही एक निर्यात खेप को रोका। निर्यात दस्तावेजों में बताया गया था कि इस खेप में 300 मिलीग्राम की प्रेगाबालिन कैप्सूल भेजी जा रही है। हालांकि, विस्तृत जांच के दौरान निर्यात खेप के भीतर छिपाकर रखी गयी 250 मिलीग्राम की एक लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट (लगभग 25 किलोग्राम) और 200 मिलीग्राम की एक लाख टैपेंटाडोल टैबलेट (लगभग 20 किलोग्राम) बरामद की गयी और जब्त कर ली गयी।

ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड एक नशीला पदार्थ है। एक सप्ताह तक चले अभियान में नशीली दवाओं के अवैध निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और कच्चा माल जब्त किया गया, तथा सिंडिकेट के तीन प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।

ट्रामाडोल टैबलेट का गुप्त रूप से निर्माण महाराष्ट्र के अंबरनाथ स्थित एक कारखाने में किया जाता था। उनकी पहचान छिपाने के लिए उन्हें सादे कार्टन में पैक किया जाता था। इसके बाद इन खेपों को मुंबई एयर कार्गो परिसर के पास स्थित एक गोदाम में ले जाया जाता था, जहां उन्हें सफेद बोरियों में दोबारा पैक कर नाइजीरिया में अवैध निर्यात के लिए तैयार किया जाता था।

एक सप्ताह के दौरान की गयी कई समन्वित अनुवर्ती कार्रवाइयों में डीआरआई अधिकारियों ने निर्यातक, निर्माता, आपूर्तिकर्ता, ट्रांसपोर्टर और भंडारण गोदाम से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली। निर्माण स्थल पर की गयी तलाशी के दौरान टैबलेट बनाने वाली मशीनरी के अलावा बड़ी मात्रा में कच्चा माल भी जब्त किया गया, जिसका इस्तेमाल नशीली दवाओं के गुप्त निर्माण में किया जाना था।

इस अभियान में तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें निर्यातक, आपूर्तिकर्ता-सह-समन्वयक और ट्रामाडोल टैबलेट का गुप्त निर्माता शामिल है।

ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल सिंथेटिक ओपिओइड दर्द निवारक दवाएं हैं, जिनका उपयोग चिकित्सकीय निगरानी में मध्यम से गंभीर दर्द के उपचार के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। इनके दुरुपयोग की संभावना और निर्भरता के जोखिम को देखते हुए दोनों दवाएं कड़े नियामक नियंत्रण के अधीन हैं। ट्रामाडोल को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत नशीली दवा के रूप में अधिसूचित किया गया है।

टैपेंटाडोल वर्तमान में एनडीपीएस अधिनियम की अनुसूची में शामिल नहीं है, फिर भी इसे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम तथा उसके तहत बनाये गये नियमों के अंतर्गत कड़ाई से विनियमित किया जाता है। इन दवाओं का अवैध निर्माण, उनका अवैध रूप से अन्यत्र भेजा जाना (डायवर्जन) और तस्करी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय है तथा इनका संबंध अक्सर संगठित अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से पाया जाता है।

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