रायपुर , जून 27 -- छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा है कि डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से राज्य के पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।

अंबिकापुर के लखनपुर में आयोजित सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर मीट में विभिन्न जिलों से आए डिजिटल क्रिएटर्स से संवाद करते हुए आज अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि पर्यटन, संस्कृति और समाज को नई पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने युवाओं से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों, लोक संस्कृति और जनजातीय जीवन की सकारात्मक कहानियों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी, सिरपुर, भोरमदेव, रामगढ़, मैनपाट, बारसूर, चंद्रखुरी और दंतेवाड़ा जैसे पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार से राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

अग्रवाल ने स्वच्छता को सफल पर्यटन की आधारशिला बताते हुए डिजिटल क्रिएटर्स से अपने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से स्वच्छता और जिम्मेदार पर्यटन का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पर्यटन स्थल ही पर्यटकों पर स्थायी प्रभाव छोड़ते हैं।

उन्होंने 29 और 30 जून को सरगुजा के ऐतिहासिक स्थल रामगढ़ में आयोजित होने वाले दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव के व्यापक प्रचार-प्रसार का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण अवसर है।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन अधोसंरचना के विकास, धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने, जनजातीय संस्कृति के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बेहतर सड़क, मूलभूत सुविधाएं, स्वच्छता, सुरक्षा और आधुनिक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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