चेन्नई , सितंबर 6 -- देशभर के 20 राज्यों में 89 स्थानों पर की गई छापेमारी और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के दो दिन बाद, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े साइबर धोखाधड़ी मामलों में रविवार को पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

इसके साथ ही इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या बढ़कर आठ हो गई है।

सीबीआई के अनुसार, 'ऑपरेशन चक्र-छह' के तहत डिजिटल अरेस्ट अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान को आगे बढ़ाते हुए यह गिरफ्तारियां की गई हैं, जिससे इस वित्तीय धोखाधड़ी के पीछे सक्रिय संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

जांच के दायरे में शामिल तीन मुख्य मामलों में कुल 42.36 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। इनमें राजस्थान के बिट्स पिलानी का वह चर्चित मामला शामिल है जिसमें पीड़ित को फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उनसे 7.67 करोड़ रुपये ठगे गए। इसके अलावा गुजरात में एक पीड़ित को 3 महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 19.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई और कर्नाटक में एक पीड़ित को एक महीने तक डिजिटल रूप से बंधक बनाकर 15.45 करोड़ रुपये ऐंठे गए।

इससे पहले हुई छापेमारी में तीन मुख्य सहायकों हरियाणा के आकाश (1.95 करोड़ रुपये प्राप्तकर्ता), कोलकाता के राजा कर्मकार (1.5 करोड़ रुपये प्राप्तकर्ता) और ज्योति रानी (नकद निकासी व फंड ट्रांसफरकर्ता) को गिरफ्तार किया गया था।

ताजा कार्रवाई में सीबीआई ने अवैध पैसों को ठिकाने लगाने, लेयरिंग करने और बांटने में शामिल पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इटारसी के संकेत बास्तवार और पंकज दमड़े ने धोखाधड़ी से बैंक खाता खुलवाकर उसमें ठगी की रकम मंगवाई और आगे भेजा। वहीं नयी दिल्ली के आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी तथा गाजियाबाद (यूपी) के शशांक सिंह उर्फ रवि बैंक खातों की व्यवस्था करने और धन को कई खातों में ट्रांसफर करने में शामिल थे।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने खाताधारक के मोबाइल फोन में एक 'एपीके' फ़ाइल इंस्टॉल कर दी थी, जिससे वे बैंक के एसएमएस अलर्ट इंटरसेप्ट कर बिना जानकारी के गुप्त रूप से खाते का संचालन कर रहे थे। सीबीआई अब इस व्यापक संगठित नेटवर्क के अन्य सहयोगियों को पकड़ने के लिए अपनी जांच और तलाश अभियान जारी रखे हुए है।

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