नयी दिल्ली , अप्रैल 28 -- भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सएप ने साल 2026 में अब तक लगभग 9,400 ऐसे अकाउंट्स को ब्लॉक किया है, जिनका इस्तेमाल 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने के लिए किया जा रहा था।

अदालत को बताया गया कि यह कार्रवाई विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर की गयी है, जिसका मकसद कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों का रूप धरकर ठगी करने वाले संगठित नेटवर्क पर नकेल कसना है। स्टेटस रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि भारतीय यूजर्स को निशाना बनाने वाले इनमें से ज्यादातर अकाउंट्स दक्षिण-पूर्व एशिया, मुख्य रूप से कंबोडिया के स्कैम सेंटरों से संचालित किये जा रहे हैं।

यह जानकारी उच्चतम न्यायालय के 2025 में शुरू की गयी स्वत: संज्ञान कार्यवाही के दौरान दी गयी। अदालत ने यह कदम एक बुजुर्ग की शिकायत के बाद उठाया था, जिनसे जांच एजेंसियों और न्यायपालिका का फर्जी अधिकारी बनकर 1.5 करोड़ रुपये की ठगी की गयी थी। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि जालसाजों ने वीडियो कॉल और अदालत के जाली दस्तावेजों के जरिये तुरंत गिरफ्तारी का खौफ पैदा कर पैसे ऐंठ लिये थे। इस पर कार्रवाई करते हुए कई एजेंसियों ने मिलकर ठगी के इन तरीकों की पहचान की। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि 'फैन-आउट' जांच तकनीक की बदौलत वॉट्सएप ने अधिकारियों से मिले शुरुआती संकेतों की तुलना में कहीं ज्यादा अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाया है।

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