पटना , अप्रैल 18 -- राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने शनिवार को डेवलपमेंट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, पटना के दीक्षांत समारोह में कहा कि "जिज्ञासा" सफलता और नेतृत्व का मूल तत्व है और डिग्रियां हासिल करने के बाद जिम्मेदारियों को को निभाने में इससे मदद मिलती है।

श्री हसनैन ने इस अवसर पर उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी को "जिज्ञासु" होना चाहिए। ऐसा होने से व्यक्ति के अंदर सफलता हासिल करने के लिए आवश्यक नेतृत्व की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि यह समारोह केवल डिग्रियों के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि अभी विद्यार्थियों के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहाँ उन्हें शिक्षा प्राप्त करने के बाद जिम्मेदारी निभाने के दौर में प्रवेश करना होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि वह अपने काम के दौरान नियमों और प्रक्रियाओं की गहराई को समझें तथा उनमें निहित संभावनाओं का समाज के हित में उपयोग करें।

राज्यपाल ने महात्मा चंपारण प्रवास के दौरान महात्मा गांधी के ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि 'सही और गलत का निर्णय केवल अनुमति या निषेध के आधार पर नहीं, बल्कि अंतरात्मा की आवाज़ के आधार पर होना चाहिए।' उन्होंने कहा कि व्यावसायिक जीवन में कई बार आसान और सही रास्ते अलग-अलग होंगे, ऐसे में सही निर्णय लेने का साहस ही सही नेतृत्व की पहचान है।

श्री हसनैन ने आधुनिक वैश्विक परिप्रेक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की दुनिया अत्यंत जटिल और अनिश्चितताओं से भरी हुई है, जिसे अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में "ग्रे ज़ोन" के रूप में समझा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बदलती हुई दुनिया में स्पष्ट सोच, विवेक और आत्मनिर्णय की क्षमता अत्यंत आवश्यक है।

राज्यपाल ने प्रबंधन के छात्रों से कहा कि केवल नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति "ट्रांज़ैक्शनल लीडर" बन सकता है, लेकिन समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने के लिए "ट्रांसफॉर्मेशनल लीडरशिप" की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि सही नेतृत्व वही है, जो किसी भी परिस्थिति की जड़ तक जाकर आमूलचूल परिवर्तन लाने का प्रयास करे।

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