जबलपुर/डिंडौरी , अक्टूबर 21 -- मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में शासकीय राशि के कथित गबन के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर ने छह अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना में लिया है। मामले में 60.60 लाख रुपये की राशि का कथित रूप से अवैध और दोहरा भुगतान किए जाने का आरोप है।

ईओडब्ल्यू की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, मामले में तत्कालीन सीएमएचओ आर.के. मेहरा और रमेश सिंह मरावी, तत्कालीन जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ) बल्देव सिंह भलावी और भरत सिंह टेकाम, सहायक ग्रेड-3 गुलाब साहू तथा सुपरवाइजर प्रकाश परस्ते को आरोपी बनाया गया है। प्रकरण में अपराध क्रमांक 109/2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच में एक अप्रैल 2016 से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि से संबंधित भुगतान की पड़ताल की गई।

प्रेस नोट के मुताबिक, शिकायत में सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ तत्कालीन अधिकारियों और लेखा शाखा से जुड़े कर्मचारियों पर शासकीय राशि के गबन के आरोप लगाए गए थे। जांच में पाया गया कि संबंधित कर्मचारी आईएफएमआईएस पोर्टल पर क्रिएटर, वेरिफायर और अप्रूवर की भूमिका में कार्यरत थे। आरोप है कि पोर्टल पर गलत एरियर गणना पत्रक तैयार कर पात्रता से अधिक राशि के भुगतान की प्रविष्टियां की गईं।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, पूर्व में मैन्युअल रूप से भुगतान किए गए एरियर की राशि की प्रविष्टियों में कथित अनियमितताओं के जरिए लगभग 49.89 लाख रुपये का अवैध भुगतान किया गया। इसके अलावा बिना वैधानिक आदेश के मद परिवर्तन कर नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस और गृह भाड़ा मद में 5.89 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किए जाने का आरोप है।

जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू को जुलाई 2024 में एरियर स्क्रीन के माध्यम से बिना कार्यालयीन आदेश और संबंधित दस्तावेजों के 4.78 लाख रुपये का भुगतान किया गया। उस समय साहू स्वयं लेखा शाखा के प्रभारी थे। इसके अलावा वेंडरों को किए जाने वाले भुगतानों में भी दोहरे अथवा गलत भुगतान की अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है।

प्रेस नोट के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से वित्तीय नियमों की अनदेखी करते हुए बिलों को डिजिटल हस्ताक्षर से स्वीकृत किया, जिसके बाद राशि लाभार्थियों अथवा संदिग्ध बैंक खातों में स्थानांतरित हुई। ईओडब्ल्यू ने प्रथम दृष्टया शासकीय निधि को नुकसान पहुंचाने और आरोपियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोपों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

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