मोतिहारी , अक्टूबर 22 -- च्चों को यौन शोषण और उत्पीड़न से बचाने तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के लिए बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के कक्षा एक से आठ तक के विद्यालयों में बचपन बचाओ अभियान के तहत पॉक्सो अधिनियम को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा।जागरूकता कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय से एक शिक्षक और एक शिक्षिका को प्रशिक्षित कर बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार की पहचान, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा शिकायत करने के अधिकार की जानकारी दी जाएगी।

मोतिहारी में आयोजित कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव एवं न्यायाधीश नितिन कुमार त्रिपाठी ने विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि उनके साथ किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार होने पर उन्हें चुप रहने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और समय पर शिकायत संभावित अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

न्यायधीश श्री त्रिपाठी ने कहा कि बाल यौन शोषण के मामलों में भय, संकोच, धमकी और सामाजिक दबाव अक्सर बच्चों की आवाज दबा देते हैं। कई बच्चे अपने साथ हुई घटना की जानकारी माता-पिता या शिक्षकों को नहीं दे पाते। वहीं, सामाजिक प्रतिष्ठा और लोक-लाज की चिंता में कुछ परिवार भी ऐसी घटनाओं को सामने लाने से बचते हैं। ऐसी चुप्पी अपराध करने वालों को बच निकलने का अवसर दे सकती है और दूसरे बच्चों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकती है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को भरोसा दिलाना जरूरी है कि किसी भी अनुचित व्यवहार के लिए वे दोषी नहीं हैं और अपनी बात बताने पर उन्हें डांटा या अपमानित नहीं किया जाएगा। अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की बात धैर्यपूर्वक सुनने, उनकी शिकायत को गंभीरता से लेने और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों तथा बाल संरक्षण तंत्र की सहायता लेने के लिए संवेदनशील बनाया जाएगा।

न्यायधीश श्री त्रिपाठी ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम, 2012 अठारह वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। इसमें बच्चों के अनुकूल तरीके से बयान दर्ज करने, जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उनकी गरिमा और गोपनीयता की रक्षा करने के प्रावधान हैं।

जिला प्रशासन द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार जागरूकता कार्यक्रमों में बच्चों को सरल भाषा में बताया जाएगा कि कोई व्यक्ति अनुचित तरीके से छूने, डराने-धमकाने, अश्लील सामग्री दिखाने या किसी असुरक्षित गतिविधि के लिए मजबूर करे तो वे किसी भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक या जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। उन्हें यह भी समझाया जाएगा कि अनुचित व्यवहार करने वाला व्यक्ति केवल अनजान ही नहीं, बल्कि परिचित भी हो सकता है।

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