जिनेवा , जुलाई 24 -- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 25 जुलाई को मनाए जाने वाले 'डूबने से बचाव दिवस' से पहले 'प्रोटेक्ट' नाम की एक नयी पहल शुरू है। इसका उद्देश्य दुनिया भर की सरकारों और स्थानीय समुदायों को डूबने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सात प्रभावी और व्यवहारिक उपाय अपनाने में मदद करना है।
दुनिया भर में हर साल तीन लाख से अधिक लोग डूबने से अपनी जान गंवाते हैं, यानी औसतन हर घंटे 30 लोगों की मौत डूबने से होती है। इनमें से लगभग एक तिहाई बच्चे पांच साल से कम उम्र के होते हैं। इसके अलावा 5 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों की मौत के दस प्रमुख कारणों में डूबना भी शामिल है।
आंकड़ों के अनुसार, डूबने से होने वाली 90 प्रतिशत से अधिक मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं, जहां लोग नदियों, झीलों, कुओं, घरेलू जल भंडारण निकायों और स्विमिंग पूल में दुर्घटना का शिकार बनते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे और किशोर इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, तूफान और भीषण गर्मी जैसी चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हो रही है, जिससे डूबने का जोखिम और बढ़ गया है। अध्ययनों से पता चलता है कि अत्यधिक गर्मी और डूबने की घटनाओं के बीच गहरा संबंध है। ब्रिटेन में किए गए शोध के अनुसार, तापमान में प्रत्येक एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से डूबने से होने वाली मौतों में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
डब्ल्यूएचओ ने घाना में आधिकारिक रुप से इस पहल की शुरुआत की है। इसमें डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए सात प्रमुख उपाय बताए गए हैं। इनमें सुरक्षित जल ढांचा बनाना, बचाव और पुनर्जीवन की व्यवस्था मजबूत करना, जल से जुड़े कार्यस्थलों और जल परिवहन की सुरक्षा बढ़ाना, लोगों को तैराकी और जल सुरक्षा का प्रशिक्षण देना, बच्चों की देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करना और बाढ़ जैसी आपदाओं के लिए पहले से तैयारी करना शामिल है।
घाना में हर साल करीब 1,100 लोगों की डूबने से मौत होती है, यानी औसतन हर दिन तीन लोगों की जान जाती है। इस वैश्विक पहल में 'ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज' भी डब्ल्यूएचओ का प्रमुख सहयोगी है।
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