मुंबई , अगस्त 01 -- महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल के हालिया बयानों का संदर्भ देकर शिक्षा विभाग के लिए उनकी योग्यता पर गंभीर सवाल खड़ा किया।
यहां महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के 20वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने श्री पाटिल के उस बयान का मजाक उड़ाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल किये गये पत्थरों पर पाये गये पैरों के निशानों को आधार रिकॉर्ड से जोड़ा जा सकता है।
श्री ठाकरे ने व्यंग्य करते हुए कहा, "मैं श्री पाटिल के दिमाग का फिंगरप्रिंट देखना चाहता हूं।" उनकी इस टिप्पणी पर वहां उपस्थित जनसमूह हंस पड़ा। उन्होंने कहा कि श्री पाटिल को ज्ञान प्राप्त करने की उम्मीद में कोल्हापुर से पुणे भेजा गया था, जिसे महाराष्ट्र का शैक्षणिक केंद्र माना जाता है। लेकिन उन्होंने दावा किया कि इससे उनमें कोई फ़र्क नहीं आया। उन्होंने कहा कि राज्य के शिक्षा मंत्री के ऐसे बयानों से 'जेन जी' का निराश होना स्वाभाविक है।
सोशल मीडिया पर खुद और अपनी मां के खिलाफ अभद्र भाषा की निंदा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल के बयानों पर टिप्पणी करते हुए मनसे प्रमुख ने कहा कि वह इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि किसी को भी किसी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने इस मौके पर प्रधानमंत्री से भी आग्रह किया कि वे अपनी ही पार्टी के सदस्यों और समर्थकों को भी ऑनलाइन गाली-गलौज वाले व्यवहार से बचने की सलाह दें।
श्री ठाकरे ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में संगठित ट्रोलिंग व्यापक हो गयी है और उन्होंने दावा किया कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से लेकर समकालीन राजनीतिक हस्तियों तक को निशाना बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में कलाकार अक्सर ऑनलाइन गाली-गलौज के कारण सार्वजनिक रूप से अपनी राय व्यक्त करने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि 'दूसरों की भी मां होती है' और अभद्र भाषा के खिलाफ संदेश सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
दिल्ली में हाल ही में हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए श्री ठाकरे ने कहा कि कई लोगों का मानना था कि ये प्रदर्शन केवल नीट परीक्षा पत्र लीक के कारण हुए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनों में न केवल छात्र, बल्कि वे युवा भी शामिल थे जो अपनी शिक्षा पूरी कर चुके हैं। ये मौजूदा परिस्थितियों के प्रति व्यापक असंतोष को दर्शाता है। उन्होंने ऐसे जनाक्रोश का कारण बनने वाली परिस्थितियां पैदा करने के लिए सरकार और सत्ता में बैठे लोगों को जिम्मेदार ठहराया।
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