मुरादाबाद, अगस्त 30 -- रेल मंडल मुरादाबाद के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक महेश यादव ने कहा कि सत्य कभी आउट ऑफ ट्रेंड नहीं होता। ट्रेन मेनेजर रामपाल सिंह द्वारा महिला यात्री श्रीमती बुशरा का एप्पल मोबाइल लौटाने के बाद वह बोल रहे थे।वरिष्ठ डीसीएम ने कहा कि ट्रेन मेनेजर रामपाल सिंह का यह छोटा सा प्रयास न केवल रेल सेवा में कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बना, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि सच्चाई को कभी 'आउट ऑफ ट्रेंड' नहीं समझना चाहिए।ट्रेन मैनेजर की ईमानदारी ने रेलवे के प्रति यह भरोसा जगाया है, यह बदलते दौर में भी सच और कर्तव्यनिष्ठा ही सबसे बड़ा ट्रेंड है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में अक्सर यह सुनने को मिलता है कि 'सच्चाई अब कहां बची है, यह तो बीते जमाने की बात हो गई।' जमाना बदल रहा है, पसंद-नापसंद और ट्रेंड बदल रहे हैं और लोग भी बहुत बार उसी चीज के पीछे चल पड़ते हैं जो चलन में होती है। लेकिन एक सार्वभौमिक सत्य ऐसा है जिसका ट्रेंड कभी नहीं बदलता और वह है ईमानदारी। रेल मंडल मुरादाबाद में ट्रेन मैनेजर रामपाल सिंह ने एक महिला यात्री का कीमती एप्पल मोबाइल लौटाकर इसी शाश्वत सत्य को एक बार फिर सामने रखा है। उनका यह छोटा सा प्रयास न केवल रेल सेवा में कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बना, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि सच्चाई को कभी 'आउट ऑफ ट्रेंड' नहीं समझना चाहिए।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक महेश यादव ने रविवार को बताया कि उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल में कार्यरत द्वितीय ट्रेन मैनेजर-मेल रामपाल सिंह ने यात्री सेवा, कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 28 अगस्त शुक्रवार को ट्रेन संख्या 13258 में मुरादाबाद से लखनऊ की ड्यूटी के दौरान यात्रा कर रहीं महिला यात्री श्रीमती बुशरा का एप्पल मोबाइल ट्रेन के टॉयलेट में छूट गया था। मुरादाबाद स्टेशन पर उतरने के बाद उन्हें जब मोबाइल के ट्रेन में छूट जाने का पता चला तो उनके लिए वह चिंता का विषय बन गया। इधर ड्यूटी पर तैनात ट्रेन मैनेजर रामपाल सिंह की नजर मोबाइल पर पड़ी। उन्होंने सहयात्रियों के सहयोग से मोबाइल को तत्काल सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाने की पहल शुरू की। इसके बाद यात्री से संपर्क साधकर मोबाइल उन्हें सकुशल वापस लौटा दिया।
कीमती मोबाइल वापस मिलने पर श्रीमती बुशरा और उनके परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने ट्रेन मैनेजर रामपाल सिंह की कर्तव्यनिष्ठा और त्वरित सहायता की जमकर प्रशंसा की तथा भारतीय रेल और मुरादाबाद मंडल प्रशासन के प्रति आभार जताया। दरअसल, किसी का खोया सामान लौटाना महज एक वस्तु वापस करना नहीं होता, बल्कि वह उस व्यक्ति के भरोसे को वापस लौटाना भी होता है। खासकर तब, जब सामने की वस्तु कीमती हो और उसे अपने पास रख लेना आसान विकल्प दिखाई देता हो। रामपाल सिंह ने इस आसान विकल्प के बजाय ईमानदारी का रास्ता चुना और यही उनकी पहल को सामान्य घटना से एक प्रेरणादायी प्रसंग बना देता है।
आज सोशल मीडिया और बदलते दौर में 'ट्रेंड' शब्द हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। पहनावे से लेकर विचारों और व्यवहार तक बहुत कुछ ट्रेंड के हिसाब से बदलता दिखाई देता है। लेकिन ईमानदारी और सत्य किसी ट्रेंड के मोहताज नहीं हैं। उनका मूल्य कल भी था, आज भी है और आने वाले कल में भी रहेगा। रामपाल सिंह का यह कार्य इसी सार्वभौमिक सत्य की याद दिलाता है कि सत्य का ट्रेंड कभी नहीं बदलता। रेल प्रशासन ने भी रामपाल सिंह के इस सराहनीय कार्य को यात्री सेवा और कर्तव्य के प्रति समर्पण का उदाहरण बताया है। ऐसे प्रसंग यह भरोसा कायम रखते हैं कि भीड़ में भले ही चलन बदलते रहें, लेकिन सही रास्ता कभी पुराना नहीं होता। जरूरत सिर्फ इतनी है कि लोग सच्चाई और ईमानदारी को बीते जमाने की चीज मानने के बजाय उसे अपने आज का भी 'ट्रेंड' बनाए रखें।
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