रायगढ़ , मार्च 09 -- छत्तीसगढ़ में रायगढ़ जिला कांग्रेस कमेटी के जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने सोमवार को नगर निगम पहुंचकर व्यापार अनुज्ञप्ति शुल्क (ट्रेड लाइसेंस) के विरोध में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 7 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना से छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों तक सभी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, इसलिए इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।

नगर निगम कार्यालय पहुंचे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि वर्तमान में व्यापारी पहले से ही संपत्ति कर, कचरा संग्रहण शुल्क, जीएसटी और आयकर जैसे विभिन्न करों का भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में अब गली-मोहल्लों की छोटी दुकानों, रेहड़ी-पटरी, गुमटी, ठेला-गाड़ी से लेकर बड़े दुकानदारों और शोरूम संचालकों तक सभी से ट्रेड लाइसेंस शुल्क वसूलना छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकाय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे छोटे व्यापारी हैं जो ठेला-गुमटी लगाकर या सब्जियां बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। नई व्यवस्था के तहत उनसे भी अनिवार्य रूप से अनुज्ञप्ति शुल्क वसूलने का प्रावधान किया गया है, जो गरीब और मेहनतकश वर्ग के हितों के विपरीत है।

ज्ञापन में बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा दुकानों के लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इसमें मोहल्ला स्तर की दुकानों के लिए 4 रुपये प्रति वर्गफुट, मध्यम बाजार की दुकानों के लिए 5 रुपये प्रति वर्गफुट और बड़े या मुख्य बाजार की दुकानों के लिए 6 रुपये प्रति वर्गफुट वार्षिक शुल्क तय किया गया है। वहीं नगर निगम क्षेत्र में अधिकतम वार्षिक शुल्क 30 हजार रुपये, नगर पालिका क्षेत्र में 20 हजार रुपये तथा नगर पंचायत क्षेत्र में 10 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही हर दो वर्ष में शुल्क में 5 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान भी रखा गया है।

कांग्रेस प्रतिनिधियों का कहना है कि सड़कों की चौड़ाई और बाजार की श्रेणी के आधार पर प्रति वर्गफुट लाइसेंस शुल्क तय करना व्यापारियों के लिए भारी आर्थिक बोझ साबित होगा। इससे छोटे व्यापारियों और आम जनता की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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