टोक्यो , अक्टूबर 29 -- टोक्यो की एक अदालत ने पुरस्कार विजेता लेखिका ली कोटोमी की ट्रांसजेंडर पहचान सोशल मीडिया पर उजागर करने के मामले में गुरुवार को स्थानीय जनप्रतिनिधि को 11 लाख येन (लगभग 6,972 डॉलर) मुआवजा देने का आदेश दिया।

टोक्यो जिला अदालत ने पाया कि यामानाशी प्रांत के कोफू शहर की स्थानीय जनप्रतिनिधि हिरोमी मुरामात्सु ने सोशल मीडिया पर सुश्री ली की लैंगिक पहचान का खुलासा और उनकी सहमति के बिना संवेदनशील निजी जानकारी साझा करके उनकी निजता का उल्लंघन किया है।अदालत ने इसे निजता का गैरकानूनी उल्लंघन करार दिया है।

पीठासीन न्यायाधीश योहेई मोटोमुरा ने कहा कि साझा की गई जानकारी में सुश्री ली का पहले का नाम और बचपन की तस्वीरें शामिल थीं। यह अत्यंत निजी जानकारी थी और इसे सार्वजनिक करने का कोई उचित आधार नहीं था।

पुलिस की चेतावनी मिलने के बाद मुरामात्सु ने सुश्री ली के बारे में अपनी पहली पोस्ट हटा दी थी। हालांकि, इसके बाद उन्होंने एक दूसरी पोस्ट साझा की, जिसमें नाबालिग अवस्था में सुश्री ली की तस्वीरें थीं। गुरुवार के फैसले के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सुश्री ली ने पत्रकारों से कहा, "मुझे राहत महसूस हो रही है, लेकिन मुझे जरा भी खुशी नहीं है। मेरे साथ यह सब कभी होना ही नहीं चाहिए था।"सुश्री ली ने जून 2025 में मुकदमा दायर कर 55 लाख येन (34,862 डॉलर) के हर्जाने की मांग की थी। अदालत ने उन्हें मानसिक पीड़ा के लिए 10 लाख येन और कानूनी खर्च के लिए एक लाख येन देने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने मुरामात्सु को भविष्य में इस तरह की जानकारी उजागर करने से रोकने संबंधी उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत के अनुसार, इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे कि भविष्य में भी इस तरह के उल्लंघन होने की आशंका है।

ताइवान में जन्मीं सुश्री ली 2013 में जापान चली गई थीं। उन्होंने पहचान और विदेश में बसने जैसे विषयों पर लेखन के जरिए साहित्य जगत में ख्याति अर्जित की है। उनके उपन्यासों में 'सोलो डांस' और 'द आइलैंड व्हेयर स्पाइडर लिलीज ब्लूम' शामिल हैं। दूसरे उपन्यास के लिए उन्हें 2021 में प्रतिष्ठित अकुतागावा पुरस्कार मिला था।

सुश्री ली के लेखन को देश के कुछ सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान मिले हैं, लेकिन उन्हें ऑनलाइन लगातार उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ा है। नवंबर 2024 में सुश्री ली ने सार्वजनिक रूप से अपनी ट्रांसजेंडर पहचान का खुलासा किया था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनकी पहचान उजागर करने वाली कई पोस्ट के बाद उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर महसूस हुआ।

सुश्री ली ने कहा, "ऐसा लगा जैसे मेरे पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई हो। ऐसा महसूस हुआ मानो मैं किसी अथाह खाई में गिर रही हूं। यह बेहद डरावना था।"गुरुवार का फैसला मई में आए एक अन्य फैसले के बाद आया है। उस मामले में टोक्यो जिला अदालत ने सोशल मीडिया पर सुश्री ली की ट्रांसजेंडर पहचान उजागर करने के लिए एक वकील को उन्हें 2.2 लाख येन मुआवजा देने का आदेश दिया था। सुश्री ली के वकीलों के अनुसार, किसी व्यक्ति की लैंगिक पहचान उजागर करने के मामले में मुआवजा देने का वह देश का पहला फैसला था।

जापान में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी लैंगिक पहचान उजागर करने पर रोक लगाने वाला कोई राष्ट्रीय कानून स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं है। हालांकि, कुछ स्थानीय सरकारों ने ऐसे नियम बनाए हैं, जो किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी यौन अभिरुचि या लैंगिक पहचान सार्वजनिक करने पर प्रतिबंध लगाते हैं।

पश्चिमी टोक्यो के कुनिताची शहर में 2018 में ऐसा नियम लागू किया गया था। इससे पहले 2015 में हितोत्सुबाशी विश्वविद्यालय के एक छात्र के बारे में खबर आई थी कि उसकी लैंगिक पहचान उजागर होने के बाद उसने कथित तौर पर आत्महत्या कर सुश्री ली थी।

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