, Aug. 4 -- प्रेडिक्शन ऑफ एडवर्स टीबी आउटकम्स तकनीक लाखों टीबी मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण कर उन मरीजों की पहचान करती है, जिनमें उपचार के दौरान जटिलताओं की संभावना अधिक होती है, जिससे उन्हें समय पर विशेष चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध करायी जा सके। वहीं वलनरेबिलिटी मैपिंग फॉर टीबी तकनीक निक्षय पोर्टल तथा विभिन्न सामाजिक एवं स्वास्थ्य संकेतकों के आधार पर ऐसे क्षेत्रों की पहचान करती है, जहां टीबी का जोखिम अधिक है, जिससे सक्रिय रोगी खोज अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

राज्य में गत 14 जुलाई से संचालित विशेष सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान के तहत अब तक 85 लाख से अधिक नागरिकों की स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उच्च जोखिम वाले समूहों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर आवश्यक जांच एवं उपचार से जोड़ा जा रहा है। इससे पहले टीबी मुक्त भारत अभियान 100 दिवसीय के दौरान 24 मार्च से 27 जुलाई तक प्रदेश में 38 लाख 23 हजार लोगों की स्क्रीनिंग, 34 लाख 37 हजार के चेस्ट एक्स-रे, दो लाख 79 हजार की नाट जांचें कर 58 हजार 358 नये टीबी मरीजों की पहचान की गयी। अभियान में 15,302 ऐसे रोगी टीबी से ग्रसित पाये गये लेकिन वे लक्षणहीन थे।

श्रीमती राठौड़ ने बताया कि टीबी उन्मूलन की मुहिम को तेज करने के लिए राज्य में जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, माय भारत स्वयंसेवकों, निक्षय मित्रों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा विभिन्न विभागों के सहयोग से टीबी के प्रति जागरूकता, पोषण सहायता एवं सामाजिक समर्थन का व्यापक अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी समन्वित प्रयास का परिणाम है कि वर्ष 2025 में प्रदेश की 6,547 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित प्रगति बैठक में लिये गये निर्णयों के अनुरूप भारत सरकार द्वारा राजस्थान के लिए संयुक्त सचिव स्तर के राज्य प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति भी की गयी है, जिससे राज्य में कार्यक्रम की नियमित समीक्षा, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा जिला स्तर तक प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।

राज्य सरकार द्वारा आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शिविर, स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान, शहरी एवं ग्रामीण सेवा शिविर अभियान जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से भी टीबी जन-जागरूकता गतिविधियों एवं निक्षय मित्र पहल को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया गया है। इससे आमजन में टीबी के प्रति जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

इन शिविरों के माध्यम से टीबी के लक्षण, समय पर जांच एवं उपचार तथा टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने के लिए व्यापक जनसंपर्क किया गया। साथ ही, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से निक्षय मित्र अभियान को नयी गति मिली। इसके परिणामस्वरूप अधिक संख्या में निक्षय मित्र आगे आये और टीबी मरीजों को निक्षय पोषण किट के माध्यम से आवश्यक पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया गया। इस जनभागीदारी आधारित मॉडल ने टीबी मरीजों को उपचार के दौरान पोषण संबंधी सहयोग प्रदान करने के साथ-साथ समाज में टीबी उन्मूलन के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ किया।

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