वाशिंगटन , अक्टूबर 17 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ विवाद गहराने के बीच रूस पर लगाए जाने वाले कई प्रतिबंधों पर रोक लगा दी है।

ये प्रतिबंध दो दिन बाद लागू होने वाले थे। इन प्रतिबंधों को अमेरिकी कांग्रेस ने पारित किया था और सितंबर में श्री ट्रंप ने इन पर हस्ताक्षर करके इन्हें कानूनी रूप दिया था। यह जानकारी शनिवार को बीबीसी की रिपोर्ट से प्राप्त हुई।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार रात एक कार्यकारी आदेश जारी कर कहा कि कुछ प्रतिबंधों पर रोक लगाना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है जिसका कुछ अमेरिकी सांसदों ने विरोध किया है।

पिछले सप्ताह अमेरिका और यूक्रेन के बीच रिश्ते तब तनावपूर्ण हो गए जब अमेरिका ने रूसी डीजल आयात करने के लिए एक विवादास्पद समझौता किया। जिसके बाद यूक्रेन ने ट्रंप प्रशासन पर अहम सैन्य समर्थन वापस लेने का आरोप लगाया।

डीजल समझौता होने के बाद से श्री ट्रंप और श्री ज़ेलेंस्की एक-दूसरे के खिलाफ तीखी बातें कर रहे हैं। श्री ट्रंप के यह कहने के बाद कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तुलना में श्री ज़ेलेंस्की के साथ बातचीत करना ज़्यादा मुश्किल है, श्री ज़ेलेंस्की ने एक ईयू शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कटाक्ष किया कि "असली नेताओं" के बीच आकर अच्छा लगा।

अमेरिका के नए प्रतिबंध का निशाना रूस की अर्थव्यवस्था है। इसके तहत श्री ट्रंप को व्यापक अधिकार दिए गए हैं कि वह रूसी तेल और गैस के शीर्ष पांच खरीदारों के आयात पर 100 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा सकते हैं जिनमें मुख्य रूप से चीन और भारत शामिल हैं।

इसमें श्री पुतिन सहित रूस के वरिष्ठ अधिकारियों, रूसी वित्तीय संस्थानों और मास्को के तथाकथित "शैडो फ्लीट" (जहाजों के गुप्त बेड़े) के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध भी शामिल थे जिनका इस्तेमाल मौजूदा प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता था।

श्री ट्रंप ने अब इनमें से कई प्रावधानों को हटा दिया है। रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने इस छूट को एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक क्षण करार दिया। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों से मुख्य रूप से अमेरिका और वैश्विक बाजार को गंभीर नुकसान पहुंचता और आर्थिक सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद है।

वहीं वर्जीनिया के कांग्रेस सदस्य डॉन बेयर सहित डेमोक्रेट्स ने इस कदम की आलोचना की है। उन्होंने श्री ट्रंप पर आरोप लगाया है कि वह रूस के सामने झुक गए हैं और यूक्रेन तथा ज़ेलेंस्की से मुंह मोड़ लिया है।

श्री बेयर ने एक्स पर लिखा, "श्री पुतिन के सामने श्री ट्रंप का यह नया समर्पण एक बार फिर हमारे यूक्रेनी सहयोगियों को धोखा देता है और उस कानून के स्पष्ट संसदीय इरादे की अवहेलना करता है जिसे रूस को उसके अवैध आक्रामक युद्ध के लिए दंडित करने के उद्देश्य से बनाया गया था।"इस कदम से यूक्रेन की नाराजगी और बढ़ने की संभावना है क्योंकि श्री ज़ेलेंस्की लंबे समय से कड़े प्रतिबंधों की जरूरत पर बल देते रहे हैं ताकि रूस को युद्ध प्रयासों के लिए मिलने वाली फंडिंग को सीमित किया जा सके।

श्री ज़ेलेंस्की और यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों ने श्री ट्रंप की आलोचना की थी क्योंकि उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा कीमतों को कम करने के लिए कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया था ताकि रूसी डीजल का आयात किया जा सके। ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी ऊर्जा कीमतें बहुत ज़्यादा बढ़ गई है।

श्री ट्रंप को कई महीनों से मध्य-पूर्व के संघर्ष के राजनीतिक नतीजों से जूझना पड़ रहा है जिसके कारण अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। बढ़ती महंगाई से अमेरिकी जनता के बीच श्री ट्रंप की छवि को नुकसान पहुंचा है।

श्री ज़ेलेंस्की ने कहा कि यह समझौता कुछ ऐसा ही है जैसे अमेरिका रूस के युद्ध प्रयासों में निवेश कर रहा हो। कुछ दिनों बाद, श्री ट्रंप ने दावा किया कि रूस और यूक्रेन दोनों ही रूसी डीज़ल के निर्यात को सुगम बनाने के लिए एक ऊर्जा युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं।

उल्लेखनीय है कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ऊर्जा अवसंरचनाओं पर लगातार हमले कर रहे हैं। यूक्रेन का कहना है कि ऐसा रूस की युद्ध मशीन की कमाई को सीमित करने के लिए किया जा रहा है जबकि रूस का दावा है कि वह केवल उन सुविधाओं को निशाना बना रहा है जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी सेना करती है।

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