महासमुंद , मार्च 16 -- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में टोल जांच के दौरान अवैध खनिज कारोबार का बड़ा मामला सामने आया है, जिसका खुलासा सोमवार को पुलिस ने किया।

पुलिस की जांच में स्पंज आयरन की चोरी कर फर्जी बिलों के जरिए अलग-अलग कंपनियों में खपाने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में इस अवैध कारोबार का आकार 106 करोड़ रुपये से अधिक का बताया जा रहा है। मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य कंपनियों और लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

पुलिस को गत 25 फरवरी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो ट्रकों के जरिए बिना वैध दस्तावेज के स्पंज आयरन का परिवहन किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने ट्रक संख्या सीजी 04 जेसी 4585 और सीजी 07 एवी 5290 को रोककर जांच की। जांच के दौरान चालक सोनूलाल मोंगरे और रामेश्वर मानिकपुरी से माल से संबंधित दस्तावेज मांगे गए लेकिन वे कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद पुलिस ने स्पंज आयरन को जब्त करते हुए मामला दर्ज कर लिया।

पूछताछ और आगे की जांच में पता चला कि ओडिशा के बरगढ़ जिले के सोहेला थाना क्षेत्र निवासी रंजीत सिंह चोरी किए गए स्पंज आयरन को अवैध रूप से भंडारित कर फर्जी बिलों के जरिए विभिन्न स्थानों तक भिजवाता था। पुलिस ने इस मामले में सोनूलाल मोंगरे, रामेश्वर मानिकपुरी और रंजीत सिंह को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया।

जांच के दौरान रायगढ़ जिले की एक इस्पात कंपनी का नाम भी सामने आया। आरोप है कि कंपनी के संचालक तारक घोष और उनके सहयोगियों द्वारा फर्जी बिल उपलब्ध कराए जाते थे, जिनके माध्यम से अवैध स्पंज आयरन को वैध दिखाकर विभिन्न कंपनियों में खपाया जाता था। पुलिस ने गढ़उमरिया, पुसौर स्थित इस्पात फर्म में जांच के बाद संचालक तारक घोष को भी आठ मार्च को गिरफ्तार कर लिया।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने के लिए कर्मचारियों के नाम पर कथित सेल कंपनियां बनाई गई थीं। इन्हीं कंपनियों के जरिए फर्जी इनवॉइस तैयार कर माल का परिवहन और बिक्री की जाती थी।

पुलिस के अनुसार जांच में करोड़ों रुपये के हवाला लेन-देन के संकेत भी मिले हैं। अब तक जुटाए गए दस्तावेजों के आधार पर अवैध कारोबार का आंकड़ा 106 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित की है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों व कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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