पटना , अप्रैल 08 -- राज्य में अवस्थित टोपोलैण्ड अथवा असर्वेक्षित भूमि के सर्वेक्षण और उसके प्रकृति निर्धारण की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है।

इसके साथ ही राज्य की बकास्त भूमि एवं अन्य असर्वेक्षित भूमि की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसका ब्यौरा भी मंगाया गया है। इस संबंध में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि राज्य में मौजूद टोपोलैण्ड अथवा असर्वेक्षित भूमि का भी व्यवस्थित सर्वेक्षण कराया जाएगा, जिससे ऐसी जमीनों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और उनके उपयोग को लेकर ठोस नीति बनाई जा सके। अभी तक ऐसी भूमि की राज्य में पहचान उपलब्ध नहीं है।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव को प्रत्येक जिले की असर्वेक्षित भूमि और बकास्त भूमि की समीक्षा करने के लिए निर्देश दिये गये हैं। इस विषय पर 10 अप्रैल 2026 को विभागीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई गई है। बैठक में राज्यभर में मौजूद टोपोलैण्ड अथवा असर्वेक्षित भूमि की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी तथा आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

श्री सिन्हा ने बताया कि उनका प्रारंभिक उद्देश्य विभागीय नियमों-कानूनों को व्यवहारिक, विवादरहित और पारदर्शी बनाना है। इसके लिए सूक्ष्मता और गहनता से कार्य किया जा रहा है।इस सिलसिले में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलों से ऐसी भूमि की विस्तृत सूची उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने बताया कि विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज द्वारा सभी समाहर्ताओं को पत्र भेजकर निर्देश दिया गया है कि अपने-अपने जिलों में अवस्थित टोपोलैण्ड अथवा असर्वेक्षित भूमि की पहचान कर उसका प्रतिवेदन निर्धारित प्रपत्र में शीघ्र उपलब्ध कराया जाए।

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