चेन्नई , जुलाई 05 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) दुनियाभर में अलग-अलग जगहों पर 'विश्व तमिल सम्मेलन' (डब्ल्यूटीसी) आयोजित करने की तैयारी में जुट गई है।

तमिलनाडु के मंत्री राज मोहन अभी उसी तैयारी के सिलसिले में अमेरिका में हैं और वहां शिक्षाविदों और तमिल समुदाय के लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से कार्यक्रम आयोजित करने की मंजूरी मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है।

गौरतलब है कि तमिल राजनीति का क्षेत्र मुख्य रूप से द्रविड़ पार्टियों, खासकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नियंत्रण में रहा है, जो अपने को बतौर तमिल अस्मिता के सबसे बड़े पैरोकार पेश करती रही है। द्रमुक के संस्थापक सीएन अन्नादुरई से लेकर बाद के सभी मुख्यमंत्रियों के लिए तमिलनाडु में डब्ल्यूटीसी आयोजित करना खुद को तमिलों की सेवा करने वाले नेता के तौर पर दिखाने का एक तरीका रहा है। सिर्फ श्री एमके स्टालिन और श्री एडप्पादी के पलानीस्वामी ने ही इस कार्यक्रम को आयोजित करने की कोई पहल नहीं की।

अब श्री विजय उस वैचारिक विरासत को हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं और उम्मीद है कि वह विदेश में कुछ जगहों पर डब्ल्यूटीसी का उद्घाटन भी करेंगे। डब्ल्यूटीसी द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय तमिल अनुसंधान संघ (आईएटीआर) श्रीलंकाई कैथोलिक पादरी फादर जेवियर थानीनायागम की सोच का परिणाम थी। पहला डब्ल्यूटीसी 1967 में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में और दूसरा 1968 में चेन्नई में आयोजित किया गया था। राज्य ने 1981 और 1995 में भी इसकी मेजबानी की थी।

करुणानिधि सरकार ने 2010 में कोयंबटूर में 'विश्व शास्त्रीय तमिल सम्मेलन' आयोजित की थी। इसका ऐसा नाम इसलिए रखा गया था क्योंकि आईएटीआर ने 2009 में श्रीलंका में जातीय युद्ध के दौरान हुए तमिल नरसंहार को देखते हुए इसे अपने बैनर तले डब्ल्यूटीसी के तौर पर आयोजित करने से इनकार कर दिया था।

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