चेन्नई , जुलाई 17 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्यमंत्री विजय की सरकार को गिराने के लिए तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के एक विधायक की खरीद-फरोख्त के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की गई थी।

अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और मामले पर आगे की दलीलें सुनने के लिए इसे फिर से खोलने की याचिकाकर्ता की मांग को ठुकरा दिया। गौरतलब है कि यह याचिका तिरुप्पुर के अधिवक्ता जे. बालासुब्रमण्यम ने दायर करते हुए जांच को सीबीआई को सौंपने और विधायक की खरीद-फरोख्त की कोशिशों का आरोप लगाने वाले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) विधायकों की शिकायतों की जांच का भी अनुरोध किया था।

हाल की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने अतिरिक्त दलीलें पेश करने की अनुमति मांगी और कहा कि कुछ अहम सबूत पेश करने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुलमुुरुगन की पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि मामले में फैसला पहले ही सुरक्षित रखा जा चुका है।

जजों ने स्पष्ट किया कि एक बार किसी मामले में आदेश सुरक्षित हो जाने के बाद बहस फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं होती। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक कारणों से देरी के बावजूद फैसला जल्द ही सुनाया जाएगा। गौरतलब है कि यह मामला उथंगराई विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक डॉ. एन इलायाराजा की शिकायत पर ट्रिपलिकेन थाना में दर्ज किया गया था। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि चेन्नई के अरुंबक्कम के रहने वाले यूट्यूबर तिरुनावुक्कारासु ने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर उन्हें विधानसभा में मतदान के दौरान टीवीके के फैसले के खिलाफ वोट देने के लिए प्रभावित करने की कोशिश की थी।

यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी के निर्देशानुसार वोट देने के लिए उन्हें 35 करोड़ रुपये की अवैध रिश्वत की पेशकश की गई थी और ऐसा करने से इनकार करने पर उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को जान से मारने की धमकी दी गई थी।

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