लखनऊ , अप्रैल 09 -- अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अमित देवगन टीबी (क्षय रोग) किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है और इसके बैक्टीरिया के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती। बच्चों में कुपोषण, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से टीबी का खतरा अधिक बढ़ जाता है।

गुरुवार को विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित टीबी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा गोद लिए गए 79 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। डॉ. अमित देवगन ने बताया कि बच्चों में टीबी के बढ़ते मामलों के पीछे कुपोषण, कमजोर इम्यूनिटी, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहना और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में रहना प्रमुख कारण हैं। जिन परिवारों में पहले से किसी सदस्य को टीबी होती है, वहां बच्चों में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि बच्चों में टीबी के लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे दिखाई देते हैं, जिससे पहचान में देरी हो जाती है। लगातार खांसी, बुखार, वजन घटना, भूख न लगना और कमजोरी इसके प्रमुख संकेत हैं। कई बार लक्षण स्पष्ट न होने के कारण बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है।

उन्होंने कहा कि टीबी से बचाव के लिए बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाए रखना बेहद जरूरी है। जन्म के समय दिया जाने वाला बीसीजी टीका इस बीमारी से आंशिक सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही यदि घर में किसी को टीबी है तो बच्चों को उससे दूर रखना और नियमित जांच कराना आवश्यक है।

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