मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर , सितंबर 26 -- छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले का खड़गवां विकासखंड 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत क्षय रोग उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत राज्य से चयनित चार विकासखंडों में खड़गवां को भी शामिल किया गया है।

वर्ष 2025 में टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में खड़गवां की उपलब्धियों और टीबी मुक्त पंचायतों के दावों का जमीनी मूल्यांकन करने के लिए राज्य स्तरीय अधिकारियों के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और वैश्विक स्वास्थ्य संस्था जापाईगो की संयुक्त टीम विकासखंड पहुंची है। टीम निर्धारित मानकों के आधार पर अभियान के क्रियान्वयन और जांच व्यवस्था का आकलन कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार विकासखंड के गांवों में टीबी के संभावित मरीजों की पहचान के लिए सक्रिय खोज अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत उच्च जोखिम वाले समूहों और क्षेत्रों को चिह्नित कर स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर स्क्रीनिंग कर रहे हैं। टीबी के संभावित लक्षण मिलने पर संबंधित व्यक्ति की छाती का एक्स-रे और बलगम परीक्षण कराया जा रहा है।

बीमारी की जल्द और सटीक पहचान के लिए एनएएटी (न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट) जैसी आधुनिक मॉलिक्यूलर जांच तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। टीबी की पुष्टि होने पर मरीज का तत्काल उपचार शुरू करने के साथ दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित फॉलो-अप कर रही है।

विभाग के मुताबिक टीबी मुक्त विकासखंड के निर्धारित मानकों में प्रति एक हजार की आबादी पर पंजीकृत टीबी मरीजों की संख्या एक या उससे कम रखने का लक्ष्य शामिल है। इसके साथ ही मूल्यांकन के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि संभावित मरीजों की पहचान के लिए पर्याप्त संख्या में जांच की गई है या नहीं, ताकि जांच के अभाव में संक्रमित व्यक्ति छूट न जाए।

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