अगरतला , अक्टूबर 27 -- त्रिपुरा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएसपीसीबी) ने सोमवार को अगरतला की वायु गुणवत्ता में अचानक आई गिरावट के लिए लक्ष्मी पूजा के मौके पर आतिशबाजी किए जाने को जिम्मेदार ठहराया।

वायु गुणवत्ता में गिरावट की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल अगरतला की स्थिति पर सवाल उठने लगे थे।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से सोमवार को अपराह्न में जारी आंकड़ों के बाद देशभर में इस मुद्दे पर नाराजगी देखने को मिली। सरकार पर अनियोजित विकास और पर्यावरण की स्थिति बिगड़ने के आरोप लगाए गए हैं।

सीपीसीबी के मंगलवार को जारी दैनिक वायु गुणवत्ता बुलेटिन के अनुसार, सोमवार को अगरतला का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 दर्ज किया गया, जो बुलेटिन में शामिल 13 शहरों में सबसे अधिक प्रदूषण का स्तर था।

सीपीसीबी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, 201 से 300 के बीच एक्यूआई को 'खराब' श्रेणी में रखा जाता है। इस स्तर की प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को इससे अधिक खतरा रहता है।

करीब दो सप्ताह पहले मानसून की वापसी के बावजूद अगरतला अब भी लू और असहज मौसम की स्थिति से जूझ रहा है। ऐसे में वायु गुणवत्ता में आई गिरावट ने चिंता बढ़ा दी है। टीएसपीसीबी के अधिकारियों ने हालांकि सोमवार सुबह वायु गुणवत्ता खराब होने के लिए पिछली रात लक्ष्मी पूजा के दौरान जलाए गए पटाखों को जिम्मेदार ठहराया। अधिकारियों ने बताया कि पटाखों का इस्तेमाल सीमित स्तर पर हुआ था, लेकिन यह सिलसिला सुबह तड़के तक जारी रहा, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता प्रभावित हुई।

टीएसपीसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि त्रिपुरा में शारद उत्सव की शुरुआत 17 अक्टूबर को हुई थी और इसका समापन 26 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा के साथ हुआ। उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 152 दर्ज किया गया था, जबकि आज सुबह इसमें सुधार होकर यह 114 पर आ गया।

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