रायपुर , सितंबर 21 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित जिले की चार तहसीलों में टाटा पावर को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के प्रस्ताव का कांग्रेस ने विरोध किया है।
पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने इस प्रक्रिया को सरकारी बिजली वितरण कंपनी के हितों के विपरीत बताते हुए इसके खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर करने की बात कही है।
टाटा पावर ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) के समक्ष याचिका दाखिल कर रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर क्षेत्र में 25 साल के लिए बिजली वितरण लाइसेंस मांगा है। प्रस्ताव अभी नियामकीय प्रक्रिया में है और कंपनी को लाइसेंस नहीं मिला है। आयोग ने संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए हैं तथा इस मामले में एक अक्टूबर को सार्वजनिक सुनवाई प्रस्तावित है।
श्री उपाध्याय ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण की अनुमति दिए जाने से छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि टाटा पावर ने अपने आवेदन में शुरुआती पांच वर्षों में करीब 435 करोड़ रुपए निवेश कर नेटवर्क तैयार करने की बात कही है। श्री उपाध्याय का दावा है कि इतनी राशि में प्रस्तावित क्षेत्र में नए 33 और 11 केवी सब-स्टेशन तथा लाइनें खड़ी करना संभव नहीं होगा और ऐसी स्थिति में निजी कंपनी को बाद में सीएसपीडीसीएल के मौजूदा ग्रिड का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
पूर्व विधायक ने प्रस्तावित वितरण क्षेत्र के चयन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर में औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की संख्या अधिक है और ये सीएसपीडीसीएल के लिए ज्यादा राजस्व देने वाले क्षेत्र हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनी को इन्हीं क्षेत्रों में लाइसेंस मिलने पर सरकारी वितरण कंपनी के पास अपेक्षाकृत कम राजस्व वाले ग्रामीण, कृषि और बीपीएल उपभोक्ताओं का अनुपात बढ़ सकता है।
उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को दी जाने वाली क्रॉस-सब्सिडी की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इसे सरकारी बिजली वितरण कंपनी के आर्थिक हितों से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
निजी बिजली वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए श्री उपाध्याय ने दावा किया कि भविष्य में व्हीलिंग चार्ज और दूसरे शुल्क के कारण उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है। उन्होंने इसके समर्थन में महाराष्ट्र और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में निजी बिजली वितरण के अनुभवों का भी हवाला दिया। हालांकि प्रस्तावित क्षेत्रों में भविष्य की बिजली दरें और संबंधित शुल्क अभी तय नहीं हुए हैं और ये नियामकीय प्रक्रिया के अधीन होंगे।
उन्होंने स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार को घेरा और दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली बिलों में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने 'पीएम सूर्य घर' योजना को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसे उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
श्री उपाध्याय ने कहा कि रायपुर, धरसींवा और अभनपुर महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र हैं और यहां छोटे-बड़े उद्योग पहले से बिजली की लागत सहित विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि निजी वितरण कंपनी के आने के बाद यदि औद्योगिक बिजली की लागत बढ़ती है तो इसका असर स्थानीय उद्योगों के साथ रोजगार पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार से सीएसईआरसी में दाखिल टाटा पावर की याचिका को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि यदि निजी कंपनी को बिजली वितरण लाइसेंस देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो कांग्रेस सड़क से विधानसभा तक आंदोलन करेगी। उन्होंने इसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की भी बात कही।
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