बैतूल , मार्च 20 -- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा विकसित किए जा रहे राष्ट्रीय राजमार्ग-46 के बरेठा घाट सेक्शन को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
अधिकारियों के अनुसार परियोजना को वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी आवश्यक पर्यावरणीय एवं वैधानिक मंजूरियां मिल चुकी हैं और अब मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा स्टे हटाने के आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
एनएचएआई के अनुसार, न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन करते हुए सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। जैसे ही उच्च न्यायालय से स्टे हटाने का आदेश प्राप्त होगा, लगभग 20.91 किलोमीटर लंबे इस संवेदनशील खंड में निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ कर दिया जाएगा।
करीब 634 किलोमीटर लंबा NH-46 मध्यप्रदेश के भीतर स्थित सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है, जो ग्वालियर से बैतूल तक उत्तर-दक्षिण दिशा में राज्य को जोड़ता है। यह मार्ग प्रदेश की आंतरिक कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स दक्षता और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही यह भोपाल-नागपुर कॉरिडोर का भी अहम हिस्सा है।
परियोजना के अंतर्गत बैतूल तक अधिकांश हिस्सों में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन केसला रेंज, भौंरा रेंज और बरेठा घाट क्षेत्र के लगभग 21 किलोमीटर हिस्से में काम वन्यजीव संवेदनशीलता के कारण लंबित था। यह क्षेत्र टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर का हिस्सा होने के कारण पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए 1 अप्रैल 2022 को उच्च न्यायालय ने इस खंड में निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। चूंकि यह क्षेत्र वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वाइल्डलाइफ क्लीयरेंस सहित विभिन्न अनुमतियों की आवश्यकता थी, जो अब पूरी हो चुकी हैं।
इस बीच, बरेठा घाट का मौजूदा मार्ग सड़क सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। वर्तमान में यह केवल दो लेन का घुमावदार और संकरा रास्ता है, जहां भारी वाहनों के दबाव के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है। सीमित दृश्यता, ढलान और तीखे मोड़ों के कारण दुर्घटनाओं का जोखिम भी अधिक रहता है।
स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस खंड में 51 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई, जबकि 62 से अधिक लोग घायल हुए। अधिकारियों का मानना है कि कई छोटी दुर्घटनाएं दर्ज नहीं हो पातीं, जिससे वास्तविक स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इसके अलावा, यह क्षेत्र वन्यजीवों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है, जहां अक्सर जानवर सड़क पार करते हैं। इससे न केवल यात्रियों के लिए खतरा बढ़ता है, बल्कि वन्यजीवों के जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एनएचएआई ने इस खंड के लिए एक विस्तृत 4-लेन विकास योजना तैयार की है, जिसमें सड़क चौड़ीकरण के साथ-साथ सुरक्षा सुधारों पर विशेष ध्यान दिया गया है। योजना के तहत 3 माइनर ब्रिज, 38 बॉक्स कलवर्ट, 1 रेलवे अंडर ब्रिज, 2 रोड ओवर ब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा, चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स के स्थायी समाधान के लिए विशेष रेक्टिफिकेशन कार्य भी किए जाएंगे।
परियोजना में वन्यजीव संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत 10 एनिमल अंडरपास और 1 एनिमल ओवरपास का निर्माण किया जाएगा, ताकि वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही प्रभावित न हो। साथ ही, सड़क के दोनों ओर फेंसिंग, नोइज बैरियर और बांस आधारित हरित आवरण विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव कम किया जा सके।
घाट क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से एनजे टाइप क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप, रोड मार्किंग और आधुनिक ट्रैफिक साइन लगाए जाएंगे। इसके अलावा, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल की गई हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
NH-46 का महत्व केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करता है। यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-44, राष्ट्रीय राजमार्ग-27, राष्ट्रीय राजमार्ग-52 और राष्ट्रीय राजमार्ग-47 से जुड़ता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के बीच माल परिवहन और यातायात सुगम होता है।
यह मार्ग सांची स्तूप, भीमबेटका रॉक शेल्टर्स, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और भोजपुर मंदिर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच को भी आसान बनाता है।
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