चंडीगढ़ , अक्टूबर 18 -- शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता एवं बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीयगृह मंत्री अमित शाह से नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या की केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पंजाब में नशा तस्करी के कथित राजनीतिक-पुलिस गठजोड़ की भी व्यापक जांच कराने की अपील की।

श्री शाह को लिखे पत्र में सुश्री बादल ने सोमवार को कहा कि झोटा के पिता भीम सिंह ने पुलिस को बयान देकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन उनके अनुसार उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने मांग की कि पिता के बयान में उठाए गए सभी पहलुओं की सीबीआई से जांच कराई जाए।

सांसद श्रीमती बादल के अनुसार, भीम सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके पुत्र को पंजाब में नशा कारोबार से जुड़े कथित राजनीतिक-पुलिस गठजोड़ के कारण निशाना बनाया गया और इस गठजोड़ को ऊंचे स्तर से संरक्षण मिल रहा था। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्य के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव का नाम भी इन आरोपों के संदर्भ में लिया।

श्रीमती बादल ने दावा किया कि भीम सिंह के अनुसार, झोटा ने मेडिकल स्टोर जाने से पहले मानसा के डीएसपी को इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि गोली मारने से पहले आरोपी अश्विनी कुमार की किसी व्यक्ति से फोन पर लंबी बातचीत हुई थी। उन्होंने इन परिस्थितियों की जांच कर हत्या के पीछे संभावित साजिश का पता लगाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि झोटा ने मानसा में मेडिकल स्टोरों के माध्यम से कथित नशा कारोबार का खुलासा किया था, जिसके बाद उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया।

श्रीमती बादल के अनुसार, भीम सिंह ने इन मामलों के पीछे तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका होने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि झोटा के जेल में रहने के दौरान मानसा के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने उनके पिता को नशा कारोबार के खिलाफ आवाज उठाते रहने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी।

श्रीमती बादल ने तत्कालीन डीएसपी संजीव गोयल पर नशीले पदार्थों के कारोबार में संलिप्तता और नशीले पदार्थ बनाने वाली इकाइयों से संबंध होने के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने मानसा के तत्कालीन औषधि निरीक्षक शिशम मित्तल पर नशा माफिया से मिलीभगत और मेडिकल स्टोरों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, भीम सिंह ने तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक संजीव गोयल और पूर्व एसएसपी नानक सिंह पर नशा कारोबार से जुड़े आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उन्होंने मौजूदा उपमंडल डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल और थाना प्रभारी बयंत कौर की भूमिका की भी जांच की मांग की।

अकाली नेता ने कहा कि इस हत्याकांड ने नागरिक समाज में चिंता पैदा की है। उन्होंने पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने में कथित देरी और अश्विनी कुमार को 2024 में हथियार का लाइसेंस दिए जाने के मामले की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि आरोपी को कथित तौर पर मन:प्रभावी पदार्थों की अवैध बिक्री के मामले में जेल से रिहा किए जाने के कुछ महीने बाद लाइसेंस दिया गया था।

श्रीमती बादल ने कहा कि सीबीआई जांच में नशा तस्करी से जुड़े अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और राजनीतिक लोगों की भूमिका की पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच में यह पता लगाया जाए कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए पुलिस तंत्र का कथित तौर पर इस्तेमाल कैसे किया गया। उन्होंने सुनाम के मोहनजीत सिंह शेरों के मामले का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक कार्यक्रम में चिट्टे की बिक्री के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने पर उनके साथ पुलिस ने प्रताड़ना की। बादल ने गुलजार सिंह की मौत का मामला भी उठाया और आरोप लगाया कि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से खुलेआम चिट्टा बिकने के बारे में सवाल करने के बाद उन्हें पुलिस प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था।

श्रीमती बादल ने कहा कि पंजाब में नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क की व्यापक और निष्पक्ष जांच से ही कथित गठजोड़ का पर्दाफाश हो सकेगा तथा नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को राहत मिल पाएगी। उन्होंने इन आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की।

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