झुंझुनू , मार्च 19 -- राजस्थान में झुंझुनू जिले में एक जीवित युवक को मृत बताने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मामले में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट (एफआर) खारिज करके चिकित्सक को तलब किया है।

झुंझुनू के राजकीय बीडीके अस्पताल में 21 नवंबर 2024 को हुई इस घटना में बिना जांच पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी चिकित्सक नवनीत मील के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया है। उन्हें सम्मन जारी करके अदालत में पेश होने के बुधवार को आदेश दिये हैं।

यह मामला 21 नवंबर 2024 का है जब बगड़ स्थित एक विमंदित पुनर्वास केंद्र से युवक को इलाज के लिए बीडीके अस्पताल लाया गया था। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. योगेश जाखड़ ने युवक को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद डॉ. नवनीत ने बिना शरीर का परीक्षण किये कागजों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर दी और शव परिजनों को सौंप दिया।

मामले में उस समय मोड़ आया जब श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान युवक के शरीर में हलचल हुई। इसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां से उसे गंभीर हालत में जयपुर रेफर किया गया। जयपुर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी।

झुंझुनू कोतवाली पुलिस ने जांच के बाद किसी को दोषी नहीं मानते हुए एफआर पेश कर दी थी। न्यायालय ने इसे खारिज करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। आठ अप्रैल 2025 को न्यायालय ने आठ बिंदुओं पर दोबारा जांच के आदेश देकर अस्पताल प्रशासन से भर्ती, ईसीजी रिपोर्ट और रेफरल डाक्यूमेंट्स की जांच रिपोर्ट मांगी। दोबारा जांच और सीसीटीवी फुटेज में सामने आया कि डॉ. नवनीत ने बिना शारीरिक परीक्षण के पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की थी।

सीजेएम कालूराम ने कहा कि शव का परीक्षण किए बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाना गंभीर अपराध है। यह न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने वाला और समाज के नैतिक मूल्यों के खिलाफ है। हर व्यक्ति का जीवन और उसकी गरिमा महत्वपूर्ण है।

न्यायालय द्वारा प्रसंज्ञान लेने के बाद अब डॉ. नवनीत के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज करके कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।

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