नारायणपुर , सितंबर 06 -- छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने झीरम घाटी नक्सली हमले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि हमले के पीछे कथित षड्यंत्र और इसमें शामिल बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की समुचित जांच नहीं की गई।

जिला कांग्रेस कमेटी ने रविवार को यहां राजीव भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए नक्सली हमले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षाकर्मियों सहित 32 लोगों की जान गई थी। प्रदेश कांग्रेस सचिव देवनाथ उसेंडी ने कहा कि मामले में अदालत का फैसला आने के बाद भी कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित हैं।

श्री उसेंडी ने दावा किया कि एनआईए ने जिन 10 नक्सलियों को गिरफ्तार किया और जिन्हें मामले में दोषी पाया गया, वे निचले स्तर के नक्सली थे। उन्होंने सवाल किया कि इतने बड़े हमले की योजना बनाने वाले वरिष्ठ नक्सली नेताओं की भूमिका की जांच कहां तक हुई। उन्होंने परिवर्तन यात्रा का मार्ग बदलने, रास्ते से सुरक्षा हटाए जाने और हमले की योजना से जुड़े पहलुओं की जांच को लेकर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस ने कहा कि एनआईए की प्रारंभिक प्राथमिकी में गणपति और रामन्ना सहित 26 नक्सलियों को नामजद किया गया था। इनमें बसवराजू, गणेश उइके, रूपेश उर्फ संजीव, सुरेंद्र उर्फ रामचंद्र रेड्डी, जयदेव उर्फ बड्डा देव और सोनू उर्फ भूपति सहित अन्य नाम शामिल थे। पार्टी ने सवाल किया कि इनमें से आत्मसमर्पण कर चुके लोगों से एनआईए ने कब और कितनी पूछताछ की।

श्री उसेंडी ने यह भी पूछा कि घायल प्रत्यक्षदर्शियों में कितने लोगों के बयान लिए गए तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और एडीजी नक्सल से पूछताछ की गई या नहीं।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में बाधा डाली गई। पार्टी ने सवाल किया कि उच्चतम न्यायालय से एसआईटी जांच के पक्ष में फैसला आने के बाद वर्तमान राज्य सरकार ने जांच को आगे क्यों नहीं बढ़ाया।

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