रांची , अप्रैल 06 -- झारखंड में मादक पदार्थों (ड्रग्स) के बढ़ते अवैध कारोबार को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है।

अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को ड्रग्स पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस और कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट में प्रस्तुत दो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के सख्ती से पालन को सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि ड्रग्स की रोकथाम के लिए केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्ती जरूरी है। अदालत ने केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकार को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया, ताकि ड्रग्स नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

कोर्ट ने यह भी कहा कि स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में छात्र-छात्राओं के बीच जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है। इसके लिए वर्कशॉप आयोजित कर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए, जिससे नई पीढ़ी को इस खतरे से बचाया जा सके।

सरकार द्वारा पेश किए गए एसओपी में ड्रग्स मामलों के अनुसंधान, सर्च ऑपरेशन, जब्ती कार्रवाई और मादक पदार्थों की अवैध खेती को नष्ट करने जैसे बिंदु शामिल हैं। अदालत ने इन सभी प्रक्रियाओं को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि राज्य में ड्रग्स का अवैध कारोबार बड़े स्तर पर फैल चुका है। पुलिस द्वारा एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मामले दर्ज किए जाने के बावजूद बड़े तस्करों पर ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है। अदालत ने मनी ट्रेल की सही जांच नहीं होने और मोबाइल कॉल डिटेल्स के जरिए बड़े नेटवर्क का खुलासा न होने पर भी नाराजगी जताई थी।

कोर्ट ने साफ कहा कि केवल छोटे-छोटे पेडलर्स को पकड़ने से समस्या का समाधान नहीं होगा। असली जरूरत बड़े ड्रग सिंडिकेट और नेटवर्क पर कार्रवाई करने की है। इसी के तहत अदालत ने डीजीपी झारखंड और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (पटना जोन) के अधिकारियों को तलब कर विस्तृत चर्चा की थी और कड़े निर्देश दिए थे।

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी कुमार वैभव और रांची नगर निगम की ओर से एलसीएन शाहदेव ने पक्ष रखा। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद जनहित याचिका को निष्पादित करते हुए सरकार को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

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