रांची , अप्रैल 11 -- झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कानूनी आपत्तियां जताते हुए संबंधित फाइल राज्य सरकार को वापस कर दी है।
राज्यपाल श्री गंगवार ने विशेष रूप से उन नामों पर कड़ा ऐतराज जताया है, जो सक्रिय राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं। राजभवन ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि इन नामों पर स्थिति स्पष्ट की जाए। बताया जा रहा है कि राजनीतिक दलों के पदाधिकारी सूचना आयुक्त बनने की निर्धारित अर्हता पूरी नहीं करते, इसी आधार पर फाइल लौटाई गई है।
इससे पहले 25 मार्च को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने अनुज सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक के नाम राज्यपाल को भेजे थे। इनमें अनुज सिन्हा पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े हैं, जबकि अन्य तीन नाम विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी हैं।
इन नामों को लेकर विवाद तब और बढ़ गया, जब लोक भवन ने विधिक राय मांगी। विधिक सलाह में स्पष्ट कहा गया कि संबंधित नाम सूचना आयुक्त पद की पात्रता को पूरा नहीं करते। इसके आधार पर राज्यपाल ने पैनल को मंजूरी देने से इनकार कर दिया।
श्री गंगवार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया, खासकर अंजलि भारद्वाज वर्सेस यूनियन ऑफ़ इंडिया केस से जुड़े फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता के मानकों का पालन आवश्यक है।
इस बीच, कई सामाजिक संगठनों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने भी इन नामों पर आपत्ति जताई थी। पूर्व सांसद रामटहल चौधरी, अधिवक्ता सुनील महतो और उमाशंकर सिंह सहित कई लोगों ने राजभवन को ज्ञापन सौंपकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
आरटीआई एक्ट के अनुसार सूचना आयुक्त के पद के लिए वही व्यक्ति पात्र होता है, जिसे विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंपर्क या प्रशासन-शासन का व्यापक अनुभव हो और जो अपने क्षेत्र का प्रतिष्ठित व्यक्ति हो।
फाइल लौटाने का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि मुख्य सूचना आयुक्त के नाम की अनुशंसा नहीं की गई थी। चयन समिति ने केवल चार सूचना आयुक्तों के नाम भेजे थे।
अब फाइल वापस लौटने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता वाली समिति, जिसमें नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और मंत्री हफीजुल हसन शामिल हैं, दोबारा बैठक कर नए नामों पर विचार करेगी। संभावना जताई जा रही है कि इस बार पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवेदकों की सूची कार्मिक विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जा सकती है।
इधर, इस पूरे मामले पर झारखंड हाई कोर्ट भी नजर बनाए हुए है। कोर्ट ने 13 अप्रैल को इस मामले की अगली सुनवाई तय की है। राज्य सरकार ने पहले अदालत को आश्वासन दिया था कि 7 अप्रैल तक नियुक्ति अधिसूचना जारी कर दी जाएगी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
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